Wednesday, April 20, 2011

यमुना बचाने को अनशन पर बैठे लोगों की हालत बिगड़ी


यमुना बचाओ आंदोलन के तहत कई दिनों से जंतर मंतर पर छह दिनों से आमरण अनशन पर बैठे कई लोगों की हालत बिगड़ने लगी है और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा है। इस आंदोलन में अब दिल्ली का संत समाज भी उतर आया है। अखिल भारतीय संत समिति इसे धार देने में जुट गई है। जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे संतों व किसानों में कई लोगों की हालत अब बिगड़ती जा रही है। सोमवार को भी कम से कम तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इतना होने के बावजूद सरकार की तरफ से इस ओर कोई ठोस पहल न करने से कई बार किसान उग्र हो जा रहे हैं और रेल मार्ग व सड़क जाम करने को तत्पर दिख रहे हैं। हालांकि संत समाज इसके लिए अभी राजी नहीं दिख रहा है। संतों का मानना है कि सरकार को सदबुद्धि अवश्य आएगी और उनकी मांगें अहिंसक ढंग से ही पूरी होंगी। जागरण से बातचीत में कई किसानों ने कहा कि वे कई दिनों से अपना घरबार छोड़ कर यहां धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनके वाजिब मांगों को मानने में भी आनाकानी कर रही है। यदि हम रेल मार्ग जाम कर दें तो सरकार की तरफ से तुरंत मांगें मान ली जाएंगी। किसानों का कहना है कि संत समाज के कहने पर ही वे अब तक शांति पूर्वक अपना अनशन जारी रखे हुए है। किसान यूनियन के नेताओं का भी कहना है कि रेल मार्ग जाम करने का आह्वान केवल संत समाज की सलाह पर ही आगे की ओर टाला जा रहा है। उधर,अखिल भारतीय संत समिति, दिल्ली के अध्यक्ष व कालकाजी पीठ के महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत ने कहा कि यदि संतों की मांगे नहीं मानी जाती है तो दिल्ली सहित पूरे देश के संत अब इस मुहिम में इस क्रम में प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधि मंडल बुधवार को प्रधानमंत्री से मिल अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील करेगा।


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