Monday, April 11, 2011

लोकपाल बिल पर सभी दलों से चर्चा हो


लोकपाल बिल और अन्ना हजारे के अनशन के संदर्भ में जागरण के सवालों के जवाब दे रहे हैं भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहस संसद के बाद अब जनता के बीच है। अन्ना हजारे ने गैर राजनीतिक मंच से जन लोकपाल विधेयक के मसौदे के साथ सरकार को लोकपाल विधेयक लाने के लिए बाध्य किया है। भाजपा भी संसद से सड़क तक भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाए हुए है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी भी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की हजारे की भावनाओं से सहमत हैं। उनका मानना है कि लोकपाल विधेयक संसद में लाने के पहले सरकार सभी दलों के साथ विचार-विमर्श करे। हालांकि वह अपनी कुछ सरकारों पर लग रहे जमीन आवंटन के घोटालों में भ्रष्टाचार के आरोपों से सहमत नहीं है। उनसे इस मुद्दे समेत अन्य कई विषयों पर रामनारायण श्रीवास्तव ने लंबी चर्चा की। प्रस्तुत हैं उनसे चर्चा के प्रमुख अंश : अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन कर सरकार को लोकपाल विधेयक लाने के लिए बाध्य किया। क्या भाजपा पूरी तरह से उनके साथ है? अन्ना हजारे का अनशन लोगों के भीतर के असंतोष का दिखाता है। पिछले दिनों में राष्ट्रमंडल खेल, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला व काले धन का जो मामला आया है उसे देखते हुए उन्होंने लोकपाल की नियुक्ति का विषय देश के सामने रखा है। आज की स्थिति में आम लोगों का भी मानना है कि इस बारे में विधेयक मंजूर होना चाहिए। इसलिए इसके बारे में कोई कानून व नियम बनाने की बात आती है तो भाजपा केंद्र सरकार का सहयोग करने पर जरूर विचार करेगी। क्या आप जन लोकपाल विधेयक के मसौदे से सहमत हैं? मोटे तौर पर इस तरह के विधेयक की भावना से सहमत हैं, लेकिन केंद्र सरकार को इस तरह का विधेयक लाने से पहले सभी विपक्षी व सत्ता पक्ष के दलों के साथ विचार विमर्श जरूर करना चाहिए। भ्रष्टाचार के आरोपों से भाजपा की राज्य सरकारें भी घिरी हैं। मध्य प्रदेश में कुशाभाऊ ठाकरे ट्रस्ट को जमीन आवंटन सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है? देखिए, आपके विचारों से मैं थोड़ा सहमत नहीं हूं। कुशाभाऊ ठाकरे ट्रस्ट एक चैरिटेबल ट्रस्ट है। ठाकरे जी ने अपना जीवन देश को भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में दिया है। वह अविवाहित थे। उनकी कोई अपनी संपत्ति नहीं थी, कोई परिवार नहीं था। उनके नाम पर एक चैरिटेबल ट्रस्ट है, कोई पब्लिक लिमिटेड या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है। उसका उद्देश्य यह है कि हम लोग राजनीति में काम करने वाले कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण करें। जनसुविधा व शैक्षिक संस्था जैसा इसका उद्देश्य है। कांग्रेस ने तो नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के नाम से हजारों जगहें दी है। एक अच्छे चैरिटेबल काम के लिए जगह देना भ्रष्टाचार की बात नहीं कही जा सकती है। कर्नाटक व उत्तराखंड में भी जमीन आवंटन घोटाले के मामले सामने आए हैं। जहां तक कर्नाटक की बात है तो जिस तरह से राष्ट्रमंडल खेल घोटाले पर सीबीआइ व प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट आई व 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कैग की रिपोर्ट आई, उस तरह की कोई रिपोर्ट कर्नाटक में तो आई ही नहीं है। जिस एक्ट के तहत उन्होंने जमीन आवंटित की थी, उसके तहत तो पूर्व में धर्म सिंह, एसएम कृष्णा व कुमारस्वामी ने कई निर्णय किए हुए हैं। उत्तराखंड के बारे में भी अभी तक ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है। इसलिए इन मामलों की राष्ट्रमंडल व 2 जी घोटालों से तुलना करना उचित नहीं है। आपने कहा कि भाजपा में जो लोग आए वे राजनीति को कमाई का धंधा समझ कर नहीं आए, इसके पीछे क्या आशय है? सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन का प्रभावी उपकरण राजनीति है। हमको समाज व देश की उन्नति के लिए काम करना है। इसके लिए राष्ट्रवाद हमारा विचार, देशभक्ति हमारी प्रेरणा और सुशासन व विकास हमारा लक्ष्य है। जो शैक्षिक, सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं, जिनके पास रहने के लिए मकान नहीं है, जिनके शरीर पर कपड़ा नहीं है, ऐसे लोगों को हम भगवान मानेंगे। यह अंत्योदय है और इसमें सारे वाद व सभी तरह के न्याय हैं। कुछ लोगों को लगता है कि सत्ता हासिल करना कमाने का धंधा है, वे ऐसा न समझें। हां राजनेता अपना उद्योग धंधा जो भी है, उसे ठीक तरह से चलाएं। कानूनी मार्ग से पैसा कमाना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन विधायक, सांसद व मंत्री बनने के बाद उस माध्यम से पैसा कमाना, यह नहीं होना चाहिए। हाल में सरकार बनाने व चलाने में जिस तरह की कारपोरेट लाबिंग की बातें सामने आई हैं, उसे कैसे देखते हैं? मुझे लगता है कि जो कुछ हुआ वह अच्छा नहीं हुआ है। जो बातें कहीं गई हैं और जो गलतियां हुई हैं उनको सुधार करके आगे बढ़ना चाहिए। इस तरह से अगर हम सभी को दोष दें तो इस देश में काम करने के लिए लोग नहीं मिलेंगे। जेपीसी व पीएसी में फिर से विवाद खड़ा हो गया है? देखिए, पीएसी हमारी संसद की स्थायी समिति है। कैग की रिपोर्ट पर काम करना उसका अधिकार है। पीेएसी को जिसे बुलाना है, बात करनी है तो वह कर रही है। जेपीसी भी हमारी संसद की बनी समिति है। पीएसी को किसी मंत्री या प्रधानमंत्री को बुलाने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी है। जेपीसी के लिए इसकी जरूरत नहीं है। मुझे लगता है कि दोनों समिति अपना काम ठीक से कर रही है। इसमें कोई भ्रम नहीं है। दोनों की रिपोर्ट देश के लिए महत्वपूर्ण है। अगर कोई कानूनी दिक्कत आती है तो उसे देखना स्पीकर की जिम्मेदारी है। जेपीसी की मांग भाजपा ने की थी। अब कांग्रेस के लोग कह रहे हैं कि जेपीसी बनने के बाद पीएसी की जरूरत नहीं है और भाजपा डॉ. जोशी पर अंकुश लगाए? पीएसी को बंद करना व शुरू करना भाजपा का सवाल नहीं है। डॉ. जोशी को अध्यक्ष पद पर मनोनीत स्पीकर ने किया है और स्पीकर के मार्गदर्शन में पीएसी काम कर रही है। कांग्रेस को कुछ लगता है तो स्पीकर को कहें। राजग सरकार के समय मंत्री रहे लोगों के जेपीसी सदस्य बनने पर सवाल उठ रहे हैं? मुझे लगता है कि इस तरह से किसी की साख व प्रतिबद्धता पर सवाल उठाना अन्यायपूर्ण होगा। ऐसे लोगों की प्रतिबद्धता असंदिग्ध है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बारे में पार्टी का क्या आकलन है? असम में भाजपा और बाकी दलों के सहयोग से हम गैर-कांग्रेस सरकार बना सकेंगे। बाकी चार राज्यों में तो हमारी अभी विधानसभा में उपस्थिति नहीं है। इस बार हम वहां तक अपनी पहुंच बना सकेंगे। साथ ही अपना वोट प्रतिशत पिछली बार से तीन गुना बढ़ा सकते हैं|

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