लोकपाल बिल पर रविवार को हुई एक कांफ्रेंस में इस बात पर सहमति बनी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बनने वाले कानून से उच्च न्यायपालिका को बाहर रखा जाना चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री को इसके दायरे में लाने पर अलग-अलग राय हैं। सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व प्रधान न्यायाधीश और लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाली समिति के 4 सदस्यों की उपस्थिति में हुई राउंड टेबल बैठक में यह सहमति बनी कि उच्च न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के किसी भी मामले से निपटने के लिए एक अलग तंत्र होना चाहिए। सिटिजंस फॉर पब्लिक अकाउंटेबिल्टी (सीपीए) के बैनर तले दिन भर चली कांफ्रेंस के बाद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएन वेंकटचलैया और न्यायमूर्ति जेएस वर्मा ने संवाददाताओं को बताया, न्यायिक जवाबदेही होनी चाहिए, लेकिन यह लोकपाल का एक हिस्सा नहीं होना चाहिए। उच्च न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए एक बेहतर तंत्र की आवश्यकता है। उच्च न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने के मामले में आम सहमति होने का दावा करते हुए सेवानिवृत्त न्यायधीशों ने कहा कि लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाली समिति में नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी ऐसा ही महसूस करते हैं। इस बीच प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखे जाने पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग राय है। उन्होंने कहा, हमें विश्वास है कि वह (प्रधानमंत्री) सिर्फ राज्य में अस्थिरता के लिए और इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के लिए जवाबदेह हैं। इस मुद्दे पर विभिन्न राय आईं और हम किसी हल पर नहीं पहुंच सके तथा इस मामले पर संसद को ही निर्णय लेने के लिए छोड़ देना चाहिए। राउंड टेबल कांफ्रेंस में भ्रष्टाचार विरोधी कानून और देश में उसको अमल में लाने के मामले के अलावा सीवीसी, सीबीआइ और लोकपाल के सहज एकीकरण और राज्यों में मजबूत और स्वतंत्र लोकायुक्त के निर्माण पर भी चर्चा हुई। कांफ्रेंस में जस्टिस वेंकटचलैया और जस्टिस जेएस वर्मा के अतिरिक्त सरकार की मसौदा समिति के सदस्य, कर्नाटक लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े, प्रख्यात वकील शांति भूषण, उनके बेटे प्रशांत भूषण, आरटीआइ कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल, सेवानिवृत्त मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णामूर्ति, पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रत्यूष सिन्हा और कुछ प्रख्यात न्यायविद भी मौजूद थे।
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