Sunday, April 10, 2011

ऐसे बनेगा सशक्त भारत


मेरे लिए सशक्त भारत एक ऐसा देश है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पोषण, आवास और रोजगार देकर हर बच्चे को पूर्ण क्षमता हासित करने अवसर प्रदान करे। यह देखते हुए कि आज हम मानव विकास सूचकांक में बहुत ज्यादा नीचे हैं, ऐसा सशक्तीकरण दूर के ढोल जैसा लगता है। मगर मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हम कुछ बातों को पूरा कर लें तो इस सपने को पा सकते हैं। सशक्तीकरण के इस सपने को पाने के लिए हमें सख्त, अलोकप्रिय और नाखुशगवार फैसले लेने होंगे। भारत की त्रासदी यह है कि हम साहसिक और कड़े फैसले लेते हुए हिचकिचाते हैं क्योंकि हम किसी को नाराज नहीं करना चाहते। हमें ऐसा नेता चाहिए जिनमें विश्वास का साहस हो, बड़े सपने देखने, मुश्किल फैसले लेने और त्याग करने का हौसला हो। हमारे नेता ऐसे लोग होने चाहिए जो कई दुनियाओं-शहरी-ग्रामीण, आधुनिक-परम्परागत, अमीर- गरीब, शिक्षित-अशिक्षित को बांध सके। उन्हें इन दुनियाओं की कद्र करनी चाहिए। यह नहीं मानना चाहिए कि विकास शून्य-शेष का खेल है, जहां एक दुनिया के लाभ का मतलब दूसरी का नुकसान है। हमारे नेताओं को यह विश्वास रखना होगा कि गरीबी की समस्या को हल करने का एकमात्र तरीका और ज्यादा नौकरियां पैदा करना और बड़ी संख्या में लोगों को खेती से हटाकर मेन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में लाना है। इसके लिए नेताओं को कार्य प्रेरित होना होगा। हम बातों से बहुत ज्यादा संतुष्ट होने वाला समाज बन गए हैं जबकि सफलता बस क्रियान्वयन का नाम है। इसके अलावा नेताओं को अपनी जाति या समुदाय के अंदर श्रेष्ठता को तरजीह देनी चाहिए। उन्हें ईमानदारी, आधुनिकता, शीघ्र कार्य करने और खुलेपन के क्षेत्र में आदर्श चरित्र बनना चाहिए। इसके लिए हर दल के नेता मिसाल बन कर नेतृत्व प्रदर्शन करें। यह मुश्किल है और एक तरह से नामुमकिन लगता है। मगर, मैं तो इस सूक्ति में विश्वास करता हूं 'एक सम्भव असम्भाव्यता विश्वसनीय सम्भावनाओं से बेहतर है।' इसे अंजाम देने का और कोई रास्ता नहीं है। शुरू में हम शायद यह देखें कि कुछ अच्छे नेता शीघ्र त्याग दिए जाएं। मगर जब हम आगामी पीढ़ी के नेताओं में यह बर्ताव देखेंगे, तो यह नियम का रूप ले लेगा। उदाहरण के लिए एक समय आयाराम-गयाराम पर रोक नामुमकिन लगता था लेकिन अब देखिए इस पर कैसे रोक लग गई। वहीं देश में ऐसी नौकरशाही होनी चाहिए जो योग्य, निडर और कार्यआधारित हो। आर्थिक विकास के लिए बड़ी योग्यताएं हैं, अनुरूपण, योजना बनाना, अनुमान लगाना, व्यापार योजना तैयारी, परियोजना प्रबंधन और क्रियान्वयन की उत्कृष्टताएं। हमारे नौकरशाह बहुत अच्छे लोग हो सकते हैं लेकिन सरकारी राशि वाली परियोजनाओं का प्रदर्शन कोई संकेत है तो वे इन योग्यताओं में बहुत लचर हैं। उन्हें इनमें प्रशिक्षित करना होगा। हमें नौकरशाही के भीतर ऐसा माहौल बनाना होगा जहां उच्च-प्रदर्शन करने वालों को बिना डरे काम करने के लिए प्रोत्साहन मिले। अगर हम वर्तमान कार्यकाल पण्राली को समाप्त करके पांच साल की अनुबंध-पण्राली और प्रदर्शन आधारित तरक्की को लागू कर दें तो बहुत बेहतर होगा। एक अफसर के हर अच्छे काम की सराहना हो और उसे पुरस्कृत किया जाए। दूसरी ओर, सीबीआई जैसी संस्थाओं के खत्म कर देना चाहिए, जिन्हें अपराधियों को पकड़ने के साधन की जगह आतंक फैलाने के साधनों की तरह इस्तेमाल किया जाता है। 'सुबूत से पहले संदेह' की नीति को बदल कर हमें 'फैसले से पहले सुबूत' की नीति बनानी होगी। अगर हम कुछ साल तक इन बदलावों पर डटें रहें, तो हम कुछ बेहतरीन अफसरों को उभरते देखेंगे। सशक्त भारत बनाने में हम कॉरपोरेट जगत को भी बदलना होगा। हमें लौहपुरुष बनना होगा और नेताओं के के कहने पर उनके समक्ष घुटने टेकना बंद करना होगा। हमें सरकार से रियायतें मांगना बंद करना सीखना होगा। हम बाजार और प्रतिद्वंद्वियों में अंतर लाने के लिए सरकार से अनुग्रह मांगते हैं तो हम भ्रष्टाचार की पण्राली में खींचे चले आते हैं। हमें समाज के सामाजिक और आर्थिक भेद कम करने की दिशा में बड़ी लगन से काम करना होगा। हमें कॉरपोरेशन के हितों को निजी हितों से ऊपर रखना सीखना होगा। अंत में, हमें, इस समाज के सौभाग्यशाली सुसम्पन्न वर्ग को जिम्मेदारी लेनी होगी ताकि भावी पीढ़ियों के लिए एक बेहतर समाज बन सके। ('बेहतर भारत बेहतर दुनिया' किताब से साभार)

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