लोकपाल विधेयक मसौदा कमेटी के गठन पर उठे विवाद को अन्ना ने 24 घंटे में ही शांत कर दिया। बाबा रामदेव से किसी भी प्रकार के विरोध से इंकार करते हुए अन्ना ने कहा, कमेटी में उन्हें ही जगह दी गई है जो विधेयक बनाने के मसौदे से जुड़े रहे हैं। इससे समिति की बैठकों में सरकार के समक्ष लोकपाल के समर्थन में तर्क रखने में मदद मिलेगी। कानून का मसौदा बनाने के रास्ते में किंचित मात्र का संदेह रोकने को पूर्ण पारदर्शिता बरती जाएगी। सरकार के साथ छुपकर कोई वार्ता नहीं होगी। बिल के मसौदे पर होने वाली बैठक में जो कुछ भी होगा, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उसे पूरा देश देखेगा। अन्ना ने कृषि मंत्री शरद पवार पर फिर दबाब बनाते हुए कहा,अगर जनता चाहती है कि तो उन्हें केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे देना चाहिए। अन्ना ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में लोकपाल बिल मसौदा कमेटी के गठन पर उठे सवालों का एक-एक कर जवाब दिया। उन्होंने कहा, मसौदा समिति में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। किरन बेदी ने खुद को कमेटी में शामिल न करने का आग्रह पहले ही किया था। रामदेव ने ही समिति में जनता के नुमाइंदों को लेकर शनिवार को सवाल खड़े किये थे। अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से आग्रह किया कि इसमें अब कोई साजिश न ढूंढे। अन्ना ने आंदोलन पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, मैं जनहित में प्राण रहने तक आंदोलन करता रहूंगा। अगर ऐसे लोगों को लगता है कि यह ब्लैकमेल है तो मैं उसे करता रहूंगा। उन्होंने कहा, लोकपाल बिल का मसौदा बनाने वाली कमेटी अपना काम 16 अप्रैल से शुरु कर देगी। पारदर्शिता के लिए कमेटी के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श का ब्योरा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पूरा देश देखेगा ताकि किसी को पूरी प्रक्रिया पर संदेह न हो। अन्ना ने कहा, लोकपाल कानून से 90 फीसदी भ्रष्टाचार खत्म होगा। बाकी 10 फीसदी के लिए और प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा, लोकपाल बिल का मसौदा तैयार वाली समिति में शामिल सभी दस सदस्य अपनी संपत्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करें। संयुक्त समिति के मसौदे पर सरकारी मंजूरी के बाद भी संसद में विधेयक पारित नहीं हुआ तो क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि उसे पारित कराने को फिर आंदोलन करेंगे। वैसे हमें संसद पर पूरा विश्वास है। इतना ही नहीं, लोकपाल बिल का मसौदा संयुक्त समिति में तैयार हो जाने के बाद उसे गांव स्तर तक ले जाना चाहेंगे। क्या आमरण अनशन पर बैठने से पहले कृषि मंत्री शरद पवार से साथ के लिए संपर्क साधा था? उन्होंने कहा, उनके आंदोलनों के दबाव में छह कैबिनेट मंत्री और 400 से अधिक अफसर हट चुके हैं। उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति से है।
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