देश की बढ़ती आबादी की रफ्तार घटाने में बीते दस वर्षो में उत्तर प्रदेश की भूमिका भले ही अहम रही हो, फिर भी वह अकेले ही जनसंख्या के मामले में ब्राजील जैसे देश से भी आगे निकल गया है। राज्य के लिए एक और खतरनाक संकेत यह है कि लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या में बेहद तेजी से गिरावट आ रही है। वैसे तो देश की आबादी बढ़ाने में अक्सर सवालों के घेरे में रहने वाले उत्तर प्रदेश के लिए जनगणना 2011 की ताजी रिपोर्ट राहत लेकर आई है। गुरुवार को जनगणना पर जारी अंतरिम रिपोर्ट बताती है कि आबादी की बढ़ती रफ्तार को कम करने में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की भी खास भूमिका रही। जाना जा सकता है कि आबादी बढ़ने की रफ्तार को कम करने का राष्ट्रीय औसत महज 3.9 प्रतिशत रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह औसत उससे भी अच्छा 5.7 प्रतिशत रहा है। 2001 की जनगणना में उत्तर प्रदेश में जनसंख्या गिरावट की जो दर 25.85 प्रतिशत थी, 2011 की जनगणना में वह घटकर 20.09 प्रतिशत हो गई है। हालांकि इस बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उप्र की जनसंख्या 16.62 करोड़ (2001 में) से बढ़कर 2011 में 19 करोड़ 95 लाख (लगभग 20 करोड़) तक पहंुच गई है। उनमें भी लगभग साढ़े दस करोड़ पुरुष व लगभग साढे़ नौ करोड़ महिलाएं हैं। सुधार के बावजूद जनसंख्या वृद्धि की इस रफ्तार के चलते प्रदेश की अकेले ब्राजील जैसे देश से भी आगे निकल गयी है, जिसकी जनसंख्या अभी 19 करोड़ है। यह देश दुनिया में आबादी के लिहाज से पांचवें स्थान पर है। जनगणना की ताजी रिपोर्ट लड़के-लड़कियों के अनुपात को लेकर भी खतरनाक संकेत देती है। राज्य में 2001 में छह वर्ष तक के बच्चों में जहां प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले 916 लड़कियां थीं, वहीं 2011 में लड़कियों की संख्या घटकर 899 पर आ गई है। पढ़ाई-लिखाई में राज्य ने मामूली सुधार किया है। 2001 में राज्य की जो साक्षरता दर 56.3 प्रतिशत थी, वह 2011 में 69.72 प्रतिशत हो तो गई, लेकिन यह राष्ट्रीय औसत 74 प्रतिशत से कम है। साक्षरता की जो स्थिति सुधरी है, उसकी बड़ी वजह महिलाओं की पढ़ाई-लिखाई में भागीदारी बढ़ना है। मसलन् बीते दस वर्षों में पुरुषों की साक्षरता दर लगभग 69 प्रतिशत से बढ़कर 79 प्रतिशत हुई, जबकि इसी अवधि में महिलाओं की यह दर 47.7 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत से भी आगे निकल गई|
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