Tuesday, April 19, 2011

अन्ना के सवालों से घिरीं सोनिया


लोकपाल विधेयक के लिए साझा मसौदा समिति पर केंद्र सरकार को झुका चुके सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कुछ कांग्रेसी नेताओं और विशेष रूप से पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह की गलत बयानबाजी और केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल की अनौपचारिक चर्चा से आजिज आकर संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक कड़ी चिट्ठी लिखकर पूछा है कि कहीं इसमें उनकी रजामंदी तो नहीं है? अन्ना ने पत्र में सीडी मामले का जिक्र करते हुए कहा है कि भ्रष्ट ताकतें भ्रष्टाचार निरोधक नए कानून को तैयार करने की प्रक्रिया बाधित करने की कोशिश कर रही हैं। अन्ना हजारे ने सोमवार को सोनिया को लिखे पत्र में पार्टी के एक महासचिव पर मीडिया में जाकर तथ्यात्मक रूप से गलत बयानबाजी करने का आरोप लगाया है। उनका इशारा दिग्विजय सिंह की ओर है। अन्ना को लग रहा है कि गलत बयानबाजी का मकसद लोगों को गुमराह करके साझा मसौदा समिति में हो रही बातचीत को पटरी से उतारना है। उन्होंने सोनिया से दो टूक पूछा है कि क्या उन्होंने अपनी पार्टी के नेता के बयानों को मंजूरी दे रखी है? दिग्विजय ने मसौदा समिति के सदस्य शांतिभूषण पर इलाहाबाद में भूखंड खरीदने में कम स्टाम्प ड्यूटी के भुगतान और कमेटी के एक अन्य सदस्य अरविंद केजरीवाल पर तल्ख टिप्पणी की थी। उन्होंने अन्ना पर दूसरों से संचालित होने की भी बात कही थी। कांग्रेस ने अन्ना की चिट्ठी पर तो चुप्पी साध ली है, लेकिन उसके प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यह कहकर दिग्विजय का बचाव किया है कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का हक है। दिग्विजय बड़े नेता हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने अपना विचार व्यक्त करके कौन सा अपराध कर दिया है?पत्र में अन्ना ने मानव संसाधन विकास मंत्री व मसौदा समिति के सदस्य कपिल सिब्बल का नाम लिए बगैर उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि समिति की पहली बैठक में शामिल एक मंत्री ने उसी दिन अपने निवास पर पत्रकारों से अनौपचारिक (डिब्रीफिंग) बातचीत में झूठी बात कही कि सिविल सोसाइटी के सदस्य सरकार के दबाव में झुक गए हैं और उन्होंने विधेयक के मसौदे को भी हल्का कर दिया है। उन्होंने सीडी मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा है कि मैं इस सोच का हूं कि जनता के लिए काम करने वालों को सार्वजनिक जांच के दायरे में होना चाहिए, लेकिन जब खुलेआम झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और नकली सीडी तैयार की जा रही है तो कोई भी यह महसूस कर सकता है कि इसका मकसद छवि खराब करना है। हजारे ने पत्र में यह भी कहा है, मैं आपसे आग्रह करूंगा कि अपने सहयोगी को सुझाव दें कि वे कानून तैयार करने की प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश न करें। देश भ्रष्टाचार निरोधक सख्त कानून के लिए अब अधिक इंतजार को तैयार नहीं है। लोग चिढ़े हुए हैं। यदि इस प्रक्रिया को पटरी से उतारा गया तो उसका जो परिणाम होगा उसे लेकर मैं भयभीत हूं। 

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