हरियाणा ने जिस दर से विकास वृद्धि हासिल की है, लगभग उतनी ही दर की गिरावट के साथ आबादी पर नियंत्रण पाने में सफलता हासिल की है। गत दस सालों में प्रदेश की आबादी में करीब 42 लाख की बढ़ोतरी हुई है। इसी के साथ राज्य की जनसंख्या दो करोड़ 53 लाख हो गई है। राज्य में सालाना औसतन चार लाख लोग बढ़े हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि लिंगानुपात सुधरा है। यानी लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुई है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, आबादी की वृद्धि दर में 8.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। 2001 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में जनसंख्या में वृद्धि दर 28.4 फीसदी थी, लेकिन 2011 में दर 19.9 प्रतिशत हो गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश में इस बार लिंगानुपात में सुधार हुआ है। हरियाणा में 2001 में एक हजार पुरुषों के मुकाबले 861 महिलाएं थीं। 2011 में यह आंकड़ा 1000-877 हो गयाहै। यह अलग बात है कि यह राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बहुत पीछे है। राष्ट्रीय स्तर पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के महेंद्रगढ़ और झज्जर जिले लिंगानुपात के लिहाज से राष्ट्रीय सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं। झज्जर में प्रति एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 774 और महेंद्रगढ़ में 778 बताई जा रही है। प्रदेश में महिलाओं की शिक्षा का स्तर राष्ट्रीय औसत के आसपास 66.8 फीसदी है, जबकि पुरुषों का 76.6 फीसदी है, जो राष्ट्रीय औसत 82.14 फीसदी से पीछे है।
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