Tuesday, April 12, 2011

लोकपाल पर बेजा सवाल


जनदबाव में केंद्र सरकार ने लोकपाल विधेयक संसद के मानसून सत्र से पहले तैयार करने की अधिसूचना तो जारी कर दी, लेकिन उसकी और दूसरे राजनीतिक दलों की कसमसाहट छिपाए नहीं छिप रही। लोकपाल विधेयक के स्वरूप को लेकर सरकार व कांग्रेस ने अन्ना हजारे समर्थकों के साथ मानसिक बढ़त का खेल शुरू कर दिया है। इसकी उपयोगिता से लेकर इसके गठन की पूरी प्रक्रिया पर ही सरकार और कांग्रेस ने सुनियोजित अंदाज में सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने तो सार्वजनिक रूप से लोकपाल विधेयक की उपयोगिता का मखौल उड़ाया। कांग्रेस ने भी साफ किया कि वह इस प्रक्रिया से सहमत नहीं है। हालांकि जब अन्ना हजारे ने पलट कर बिल ड्राफ्ट कमेटी से सिब्बल का इस्तीफा मांग लिया तो समय की नजाकत समझते हुए केंद्रीय मंत्री अपने शब्द वापस लेने पर मजबूर हो गए। लोकपाल विधेयक को बनाने के लिए गठित साझा समिति की बैठकों की वीडियोग्राफी की अन्ना हजारे की मांग का भी कांग्रेस ने मुखर विरोध किया है। साझा समिति में सरकार के प्रतिनिधि और केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि साझा समिति की बैठक की रिकार्डिंग या उसे प्रसारित करने पर कोई भी फैसला समिति को ही करना है। इससे उलट कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, बिल के लिए जिस प्रक्रिया की बात की जा रही है उससे हमने असहमति प्रकट की है। इस पर हमारा सैद्धांतिक विरोध है। उन्होंने बिल गठन की साझा समिति की बैठकों की वीडियो रिकार्डिग और उसके सीधे प्रसारण के प्रस्ताव और जनलोकपाल विधेयक के कई प्रावधानों का विरोध किया। इससे पहले सिब्बल ने रविवार को परोक्ष रूप से हजारे समर्थकों पर कटाक्ष कर संकेत दिए कि साझा समिति की बैठकों में सरकार समर्पण नहीं करेगी। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी जैसी समस्याओं को गिनाते हुए पूछा था कि आखिर लोकपाल से क्या होगा? इस पर हजारे ने सिब्बल को आड़े हाथों लिया और कहा कि यदि सिब्बल को यह लोकपाल विधेयक इतना ही फालतू लग रहा है तो उन्हें बिल गठन वाली साझा समिति से यथाशीघ्र इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने सिब्बल पर सवाल भी दागा कि क्यों वह हमारा और अपना समय बर्बाद कर रहे हैं और क्यों इस कमेटी में बने रहना चाहते हैं? अगर आपको लगता है कि इससे कुछ नहीं होने वाला है तो साझा समिति से इस्तीफा देकर उन्हें कुछ और काम करना चाहिए। हजारे के इन तेवरों के बाद सिब्बल ने सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि अन्ना जी मेरा इस्तीफा क्यों मांग रहे हैं। मैं तो चाहता हूं कि मजबूत विधेयक बने। मेरे कहने का मतलब तो सिर्फ इतना था कि लोकपाल विधेयक का दायरा अलग है और जनता की हर समस्या का क्षेत्र अलग है।

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