Tuesday, April 12, 2011

राइट टू रिकॉल के स्वरूप पर चर्चा के पक्ष में नीतीश


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राइट टू रिकॉल के स्वरूप पर चर्चा होनी चाहिए। वह सोमवार को जनता दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से रूबरू थे। उन्होंने कहा कि चाहे केंद्र हो या राज्य, जो लोग भी सरकार में हैं उन्हें भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए कड़े कदम तो उठाने ही पड़ेंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार, मैं नहीं समझता कि जनता अब भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने वाली है। अन्ना हजारे को जिस तरह से समर्थन मिला है वह जनता की भावना को स्पष्ट रूप से सामने लाता है। देश भर के लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर हो चुके हैं। यह लोकतंत्र के लिए शुभ लक्षण है। विधानसभा चुनाव अभियान के समय मैंने भ्रष्ट लोकसेवकों की संपत्ति जब्त करने की बात जब भी कही, लोगों ने इसका जबर्दस्त समर्थन किया। सरकार गठित होने के बाद इस विषय को मैंने सर्वोच्च प्राथमिकता दी। भ्रष्ट तरीके से अर्जित संपत्ति से बने लोकसेवकों के आशियाने को जब्त किए जाने का मामला प्रक्रिया में है। वह दिन दूर नहीं जब विधि सम्मत तरीके से भ्रष्ट लोकसेवकों की संपत्ति को जब्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री राइट टू रिकॉल पर भी बोले। उन्होंने कहा कि राइट टू रिकाल तो जेपी आंदोलन से निकला है। हम लोग जेपी आंदोलन की उपज रहे हैं। तीस साल बाद फिर इस बात की शुरुआत हुई है। बिहार में तो निकायों के लिए हुए संशोधन में यह अधिकार उपलब्ध भी करा दिया गया है। लोकतंत्र में तो जनता सार्वभौम है। हम लोग तो इसके पक्षधर रहे हैं। इसे किस प्रकार से लागू किया जाए इसके स्वरूप पर चर्चा हो सकती है। अन्ना हजारे द्वारा बिहार व अपनी प्रशंसा किए जाने पर मुख्यमंत्री से उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई तो उन्होंने कहा कि सारे देश के लोग आपके काम को देख रहे हैं। जब हमारे काम पर कोई नजर रखता है तो हमारी जवाबदेही और बढ़ जाती है। प्रशंसा से हौसला तो बढ़ता ही है। अन्ना हजारे द्वारा ईवीएम मशीन से मतदान न कराए जाने का मामला उठाए जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे चुनाव आयोग पर छोड़ दिया जाना चाहिए|

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