Monday, January 3, 2011

60 फीसदी पंचायतें नक्सलियों के कब्जे में

लोकतंत्र की मुखालफत करने वाले नक्सली व उनके समर्थक पंचायती राज व्यवस्था के साथ कदमताल करते नजर आ रहे हैं। झारखंड में हाल ही में संपन्न पंचायत चुनाव में करीब 3000 ऐसे प्रतिनिधि चुनकर आए जो नक्सलियों के समर्थक हैं। माना जा रहा है कि वार्ड पार्षद, मुखिया, पंचायत समिति से लेकर जिला परिषद सदस्य तक में करीब 60 फीसदी सीटें नक्सल समर्थकों को हासिल हुई हैं। कुछ ऐसे प्रतिनिधियों ने भी लोकतंत्र के मंदिर में प्रवेश किया है जो कभी हाथों में बंदूक थामे, लाल सलाम करते नजर आते थे। इतना ही नहीं सूबे की महिलाएं भी अब अबला नहीं रहीं। पंचायत चुनाव के परिणाम के बाद गांव की सरकार में उनकी 58 फीसदी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो चुकी है। अब वह सरकार चलाएंगी। इन चुनावों में नामांकन से लेकर मतदान तक की प्रक्रिया में जिस तरह राज्य की महिलाओं ने शिरकत की, तय है कि भविष्य में वह हर क्षेत्र में नई इबारत लिखेंगी। नक्सलियों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होना व समर्थन देना राज्य व राष्ट्रहित में है। नक्सली पृष्ठभूमि के जनप्रतिनिधयों का अब जनता व विकास की विभिन्न योजनाओं से सीधा रिश्ता कायम होगा तथा वे काम के लिए उत्तरदायी भी होंगे, गड़बड़ी करने पर अपने ही लोगों के बीच उजागर भी हो जाएंगे। चुनाव परिणामों की बात करें तो रांची में नक्सल समर्थकों की जीत पहले से तय थी। लापुंग में कई केंद्रों पर मुखिया व पंचायत समिति पद पर नक्सली समर्थित उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया। बुंडू, तमाड़, राहे, खलारी, बुढ़मू में काफी संख्या में नक्सल समर्थित उम्मीदवारों ने दिग्गजों को पटखनी दी। खूंटी में वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद सदस्य पद तक नक्सलियों का प्रभाव साफ दिखा। मुरहू प्रखंड में एक नक्सल संगठन के समर्थक ने बाजी मारी। अड़की, कर्रा व रणिया प्रखंड में भी नक्सलियों का प्रभाव साफ तौर पर पंचायतों में दिख रहा है। चतरा में 150 से ज्यादा पदों पर नक्सल समर्थकों ने जीत हासिल की है। कुछ ऐसा ही प्रतापपुर प्रखंड की 18 पंचायतों में हुआ है। यहां माओवादियों की चली। डालटनगंज में जेल में बंद भाकपा माओवादी के जोनल कमांडर सुरेश सिंह उर्फ बीरबल की भाभी शोभा देवी पांडू प्रखंड मुख्यालय पंचायत से मुखिया का चुनाव रिकार्ड मतों से जीत गई। गुमला में जार्ज केरकेट्टा कामडारा जिला परिषद का चुनाव जीतने में सफल रहे। जार्ज पीएलएफआई के सब जोनल कमांडर मार्टिन केरकेट्टा के सगे भाई हैं। नक्सल प्रभावित शिकारीपाड़, रामगढ़, गोपीकांदर एवं काठीकुंड से करीब एक दर्जन वैसे लोगों ने जीत हासिल की है जिन्हें नक्सलियों से समर्थन प्राप्त था।

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