चुनावों में काले धन के प्रयोग पर अंकुश की तैयारी, पहली बार लागू की जाएगी यह व्यवस्था
देश के चुनावों में बेतहाशा खर्च और काले धन के प्रयोग पर अंकुश के लिए निर्वाचन आयोग (ईसी) ने सख्त उपाय का फैसला किया है। देश के चुनावी इतिहास में पहली बार, चुनावी जंग में तकदीर आजमा रहे प्रत्याशियों की मदद के लिए ‘खर्च एजेंट’ मौजूद रहेगा। ईसी ने चुनाव से संबंधित खर्चों पर निगाह रखने के इरादे से इस बारे में अधिसूचना जारी की है। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
निर्वाचन आयोग ने इलेक्शन चार्टर के रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट में बदलाव करते हुए इस नई व्यवस्था को शामिल किया है। सूत्रों के मुताबिक, हालांकि प्रत्याशी के लिए ऐसा एजेंट रखना अनिवार्य नहीं है। अपनी जरूरत को ध्यान में रखते हुए वह इस बारे में कदम उठा सकता है। निर्वाचन आयोग ने गत 9 मार्च को राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई मुलाकात के बाद यह फैसला किया है। इस दौरान विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधियों ने पोलिंग एजेंट के अलावा एक और ऐसे एजेंट की नियुक्ति का आग्रह किया था जो संसदीय और विधानसभा चुनावों के दौरान खास तौर पर प्रत्याशी के कुल खर्च पर निगाह रखे। आयोग जल्द ही आदेश को अधिसूचित कर इसे सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय, राज्यों की राजनीतिक पार्टियों और राज्यों की मुख्य चुनाव आयुक्तों को भेजेगा। निर्वाचन आयोग पिछले वर्ष से चुनावी खर्च पर नियंत्रण के उपायों पर विचार कर रहा है। प्रत्याशियों के लिए चुनावी खर्च के लिए अब न केवल एक रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा बल्कि इसे नियमित रूप से अपडेट भी करना होगा। राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने इस तमाम जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति की इजाजत मांगी थी, जिस पर आयोग ने सहमति जताई है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) एसवाय कुरैशी ने हाल ही में चुनावी प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में काला धन लगाए जाने को लेकर गंभीर चिंता जताई थी और पांच राज्यों में चुनाव में मद्देजनर आयकर विभाग व प्रवर्तन निदेशालय को इस पर निगाह रखने को कहा था। कुरैशी ने केवल उन्हीं राजनीतिक पार्टियों के दान पर आयकर छूट देने को वकालत की थी जो वास्तव में चुनावों में हिस्सा लेती हैं।
अब तक की व्यवस्था :
पोलिंग एजेंट के रूप में अब तक केवल एक व्यक्ति को ही प्रत्याशी की ओर से काम करने की छूट थी। खर्च एजेंट की व्यवस्था के साथ ही प्रत्याशी को अब एक और ‘सहयोगी’ मिल जाएगा। खर्च एजेंट हर पोलिंग स्टेशन पर प्रत्याशी के प्रतिनिधि के तौर पर काम करेगा।
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