Thursday, May 19, 2011

आखिर कैसे परवान चढ़ती विकास की बेल


बुंदेलखंड को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकारों के बीच वादों और दावों की खेती होती रही है। वर्ष 2007 में बसपा ने जब सत्ता संभाली थी तो पाठा की धरती भुखमरी से मौतों की वजह से चर्चा में थी। बांदा के पड़ुवी गांव में कर्ज के शिकार कई लोग मौत को गले लगा चुके थे। यही वजह थी कि मुख्यमंत्री के रूप में अधिकारियों संग पहली बैठक में मायावती ने कहा था, यदि कहीं भूख से मौत हुई तो वहां के डीएम जिम्मेदार होंगे। उसके बाद से अब तक भुखमरी से मौत की कोई घटना नहीं हुई लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद दिन प्रतिदिन बंजर होती जा रही बुंदेलों-हरबोलों की धरती पर विकास की बेल परवान न चढ़ सकी। अधिकारियों के साथ पहली बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा था, अधिकारी बुंदेलखंड के लिए केंद्र सरकार से अधिक से अधिक राशि पाने की कोशिश करें। लेकिन केंद्र और राज्य के बीच टकराव के चलते यह मुमकिन नहीं हो पाया। केंद्र सरकार के 7266 करोड़ के विशेष पैकेज में 3506 करोड़ रुपये यूपी के बुंदेली क्षेत्र के लिए थे। इसमें से जो भी राशि मिली, उसे ही पूरा नहीं खर्च किया जा सका। राज्य सरकार का तर्क है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में केंद्र ने राशि अवमुक्त की जिससे रुपये खर्च कर पाना संभव ही नहीं था। यहां तक लघु सिंचाई और सिंचाई की योजनाओं की राशि भी बची रह गई। इन्हीं आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच पाठा में जलस्तर 2010 में तीन मीटर नीचे चला गया। बांदा, चित्रकूट और महोबा में इसकी वजह से आज लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। बांदा के पड़मई गांव जहां पिछले महीने कर्ज से परेशान एक किसान ने आत्महत्या कर ली, वहां के लोगों की मानें तो पिछले 7 वर्र्षो से फसल की लागत तक नहीं निकल पा रही है। इसका प्रमुख कारण सिंचाई के इंतजाम न हो पाना है। बांधों में पानी घट रहा है, तालाब सूखे हैं और पाठा क्षेत्र में एक तिहाई से अधिक हैंडपंपों में पानी नहीं आ रहा है। यहां के लिए केंद्र सरकार से अधिक रुपये हासिल करने का मुख्यमंत्री का इरादा पूरा न हो सका। उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलकर 80 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की थी जिसमें 11 हजार करोड़ बुंदेलखंड पर खर्च होने थे लेकिन यह अनसुनी ही रह गई। राज्य सरकार इसके लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराती है। उसके अनुसार केंद्र द्वारा जिस पैकेज की बात की जा रही है, उसमें 3500 करोड़ रुपये की धनराशि 3 वर्र्षो में बताई गई है, पर वास्तव में 1600 करोड़ रुपये की ही धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। शेष धनराशि केंद्र की पूर्व से चालू योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध होनी है। इसके बावजूद राज्य सरकार बुंदेलखंड क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 2008 में घोषित 1514 करोड़ रुपये से विभिन्न योजनाओं पर काम करा रही है।


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