Sunday, May 15, 2011

भंडार भरे, पर गरीबों की रसोई तक पहुंचने में अड़चन


खाद्यान्न की भारी उपलब्धता के बावजूद गरीबों को अतिरिक्त अनाज देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल आसान नहीं होगा। रबी की बंपर पैदावार और गोदामों के ठसाठस भरा होने से अनाज आवंटन में भले कठिनाई न आए, लेकिन इसे गरीबों की रसोई तक पहुंचाना कठिन जरूर होगा। अनाज के उठाव में राज्यों की उदासीनता व राशन प्रणाली की खामियां इसकी राह में मुश्किलों का सबब बन सकती हैं। गरीबों की संख्या का निर्धारण न होने से हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। मौजूदा राशन प्रणाली में अनाज के लीकेज के चलते गरीबों को पूरा अनाज नहीं मिल पा रहा है। राशन प्रणाली की गड़बडि़यों को दुरुस्त करने और गरीबों तक अनाज पहुंचाने के प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। दूसरी तरफ, गरीबों की संख्या तय करने के लिए तैयार फार्मूले पर अभी तक अमल शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की मानें तो इसी साल जून से सितंबर के बीच सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया जाएगा। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बीपीएल) परिवारों की संख्या का जो निर्धारण योजना आयोग ने किया था, उसके हिसाब से मौजूदा 6.52 करोड़ गरीब परिवारों के लिए अनाज का आवंटन करता है। इनमें 4.02 करोड़ बीपीएल श्रेणी के और 2.50 करोड़ अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) श्रेणी के राशन कार्ड धारक हैं। जबकि राज्यों के आंकड़े में गरीबों की संख्या लगभग 11 करोड़ परिवार हैं, जिन्हें राशन कार्ड जारी किया जा चुका है। इनमें बीपीएल के 8.32 करोड़ और एएवाई श्रेणी के 2.44 करोड़ हैं। राशन प्रणाली को दुरुस्त करने में राज्य सरकारें बेहद उदासीन हैं। खाद्य मंत्रालय की तरफ आवंटित अनाज उठाने में भी राज्य सरकारें सुस्त हैं। राष्ट्रीय स्तर पर बीपीएल और एएवाई वर्ग के लोगों को दिए जाने वाले अति रियायती दर के अनाज को भी उठाने में राज्य पीछे हैं। दो रुपये और तीन रुपये किलों का गेहूं व चावल शत प्रतिशत नहीं उठाया गया है। पिछले सालभर के आंकड़े को देखें तो उत्तरी क्षेत्र के राज्यों ने गेहूं व चावल उठाने में सुस्ती दिखाई थी। गरीब राज्यों के आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं, जहां अनाज उठाने का आंकड़ा संतोषजनक नहीं है। उत्तर प्रदेश और बिहार को ले लीजिए। इन राज्यों में अनाज के उठाव का आंकड़ा क्रमश: 94 फीसदी और 86 फीसदी है। झारखंड, उड़ीसा और राजस्थान का भी यही हाल है। ऐसे राज्यों से बहुत अधिक उम्मीद नहीं रखी जा सकती है।


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