अब सबसे ज्यादा करोड़पति अमेरिका या यूरोप में नहीं रहते। मंदी और कर्ज संकट की मार झेल रहे इन महाद्वीपों ने अपना यह रुतबा खो दिया है। इनकी तुलना में ज्यादा तेजी से विकास कर रहे एशिया में करोड़पतियों की तादाद अब सबसे ज्यादा हो गई है। इसके उलट देश में दौलतमंदों की संख्या में 20 फीसदी की कमी आई है। इस वजह से भारत सबसे ज्यादा रईसों वाले शीर्ष 12 मुल्कों की सूची से बाहर हो गया है। इस सूची में अमेरिका, जापान व जर्मनी क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। रिसर्च फर्म कैपजेमिनी और आरबीसी की वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में दस लाख डॉलर (करीब 5.6 करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश योग्य संपत्ति रखने वालों को ही एचएनआइ (रईस) माना गया है। इसके मुताबिक, वर्ष 2011 में दुनियाभर में इन रईसों की दौलत 1.7 फीसद घटी है। उनकी कुल संपत्ति 42 लाख करोड़ डॉलर रह गई। इस दौरान एचएनआइ की संख्या 0.8 फीसद बढ़कर 1.1 करोड़ हो गई। यह दीगर है कि भारत में करोड़पतियों की संख्या पिछले साल 18 फीसद घट गई। बीते साल शेयर बाजार में आई 33 फीसद से ज्यादा की गिरावट के चलते रईसों की संपत्ति को बड़ी चपत लगी। इससे बड़ी संख्या में लोगों ने अपना एचएनआइ का दर्जा गंवाया। नतीजतन शीर्ष 12 देशों की सूची में भारत का स्थान दक्षिण कोरिया ने ले लिया। वर्ष 2010 में देश इस सूची में शामिल हुआ था।
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