नीतिगत सुस्ती को लेकर केंद्र सरकार पर कॉरपोरेट दिग्गजों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अरबपति अनिवासी भारतीय और स्टील किंग लक्ष्मी निवास मित्तल ने अब इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि औद्योगिकीकरण को बढ़ावा न देकर सरकार देश के करोड़ों गरीबों को गरीब ही रहने देना चाहती है। हाल ही में एनआर नारायणमूर्ति, अजीम प्रेमजी, दीपक पारेख, कुमार मंगलम बिड़ला, किरण शॉ मजूमदार जैसे कॉरपोरेट कद्दावर फैसले लेने में सरकारी देरी की अलोचना कर चुके हैं। स्टील पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए लक्ष्मी मित्तल ने कहा कि औद्योगिकीकरण किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अहम है। इसमें तेजी से ही लोगों की आमदनी बढ़ती है। भारत में उद्योगों को बढ़ावा न मिलने से करोड़ों लोग लंबे समय तक गरीबी के ही दुष्चक्र में फंसे रह सकते हैं। इससे गरीबी मिटाने की कोशिश को झटका लगेगा। उन्होंने कहा कि मनमोहन सरकार को विदेशी निवेशकों के लिए निवेश की राह आसान बनाने पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत में जमीन अधिग्रहण और कच्चे माल जैसी कई ऐसी समस्याएं हैं जो समझ से परे है। सरकार को इन अड़चनों को दूर करने के उपाय तलाशने चाहिए। उनकी स्टील कंपनी आर्सेलरमित्तल पिछले छह साल से देश में परियोजना लगाने की कोशिश कर रही है। करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये (30 अरब डॉलर) के निवेश से कंपनी ने ओडिशा और झारखंड में स्टील संयंत्र लगाने की योजना बना रखी है। मगर जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी सहित तमाम नियामकीय मंजूरियों में देरी के चलते यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को देखते हुए ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसएंडपी और फिच ने देश की साख आकलन में कटौती कर दी है। मित्तल ने उम्मीद जताई कि भारत फिर से विकास की तेज रफ्तार हासिल करने में सफल रहेगा। इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित अहम क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था अभी कठिन चुनौतियों से जूझ रही है।
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