हकीकत के बजाय हवा में कारोबार (वायदा कारोबार) करने में धोखाधड़ी करने वालों को पांच लाख से लेकर 50 लाख रुपए का जुर्माना और एक साल की सजा हो सकती है। इस प्रावधान के साथ बृहस्पतिवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में वायदा कारोबार नियमन विधेयक पेश किया जा रहा है। भारत में वायदा कारोबार की रफ्तार की एक बानगी देखिए। 2003 में फिर से खोले गए इस जुआ जैसे कारोबार ने पहले साल ही एक 1.30 लाख करोड़ रुपए का कारोबार किया और 2010-11 में यह 100 लाख करोड़ रुपए पार गया। लेकिन इसका दुखद पहलू है कि यह कारोबार हकीकत में 5 प्रतिशत से भी कम होता है। वायदा कारोबार के कारण चीजें महंगी होती है। आजकल देश में बढ़ी महंगाई भी का वायदा करोबार भी एक कारण है। इसकी कारण तमाम राजनीतिक दल इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। वायदा करोबार से किसानों के बजाए बिचौलियों और व्यापारियों को फायदा होता है। लेकिन सरकार अब गुड्स यानी वस्तुओं के क्षेत्र में भी वायदा कारोबार को खोलने जा रही है। 2003 से लटके इस विधेयक को 2010 में फिर से लोकसभा में पेश किया गया था और इसे विचार करने के लिए स्थायी समिति को सौंपा गया था। समिति ने सिफारिश की थी कि वायदा कारोबार को इस तरह से नियंत्रित किया जाए कि उसका फायदा किसानों को मिले। इसके लिए किसानों को जागरूक किया जाए। सूत्रों का कहना है कि नए ड्राफ्ट में वायदा कारोबार में धोखा करने वालों को एक साल की सजा के साथ जुमार्ना की राशि 5 लाख से 50 लाख रुपए तक किया जा रहा है। मूल विधेयक में यह राशि 25 लाख रुपए थी। यह भी प्रावधान किया जा रहा है कि एक अपीलीय पंचाट होगा जो इस कारोबार की शिकायतें सुनेगा और इस पंचाट के फैसलों को केवल सुप्रीम कोर्ट में ही चुनौती दी जा सकेगी। सेल के विनिवेश प्रस्ताव पर भी होगा विचार : सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) में 10.82 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी के विनिवेश के लिए विनिवेश विभाग बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल की मंजूरी लेगा। शेयर बाजार में नीलामी के जरिए होने वाले इस विनिवेश से सरकार को 4,000 करोड़ रुपए की राशि मिलने की उम्मीद है। सेल में होने वाला यह विनिवेश बिक्री पेशकश अथवा नीलामी के जरिए किया जाएगा। वर्तमान में सेल में सरकार की 85.82 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
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