Wednesday, February 29, 2012

गांवों के गरीबों को मुफ्त दवा देगी सरकार


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वास्थ्य मंत्रालय से ग्रामीण क्षेत्र के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को मुफ्त दवा देने की नई योजना पर काम करने को कहा है। लोगों को सस्ता इलाज देने के लिए केंद्र सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के खर्च को अगले पांच वर्षो में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का ढाई प्रतिशत करने के साथ ही केंद्रीय स्तर पर दवा खरीद एजेंसी गठित करने जा रही है। 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताएं तय करने के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री ने अपने कार्यालय में योजना आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसरों संग बैठक की। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सभी को मुफ्त दवा उपलब्ध करवाने की योजना का प्रस्ताव किया। पीएम ने योजना पर तेजी से अमल करने को कहा है। इस सिलसिले में केंद्रीय दवा खरीद एजेंसी के गठन को कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुका है। साथ ही उन्होंने मंत्रालय को इलाज के मानक तय करने के लक्ष्य को भी जल्दी पूरा करने को कहा है। बैठक में तय किया गया कि 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान इस क्षेत्र में होने वाले खर्च को मौजूदा 1.4 फीसदी से बढ़ा कर 2.5 फीसदी तक किए जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने इस लिहाज से योजना आयोग को केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाने को कहा है। साथ ही कहा है कि चूंकि स्वास्थ्य मूल रूप से राज्य का विषय है, इसलिए राज्यों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बैठक के दौरान पीएम ने नकली दवा पर अंकुश के लिए औषधि और सौंदर्य प्रसाधन (संशोधन) बिल पर जल्दी विचार कर संसद में पेश करने की जरूरत बताई। स्वास्थ्य मंत्रालय से भी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन से जुड़ी योजनाओं का विलय करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। सरकार का इरादा इस पूरी प्रक्रिया 20131-4 तक पूरी करने का है।

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