Friday, November 18, 2011

सस्ते अनाज के हकदार


वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक के संशोधित मसौदे को मंजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को जल्दी ही मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। वित्त मंत्री खाद्य पर मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह के प्रमुख हैं। खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने बृहस्पतिवार को यहां कार्यक्र म के मौके पर संवाददाताओं से कहा, ‘कल शाम वित्त मंत्री ने खाद्य विधेयक के मसौदे को अंतिम मंजूरी दे दी। जल्दी ही इसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
विधेयक में प्रस्तावित महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी मिल गई है और जल्दी ही अंतर मंत्रालयी चर्चा के लिए कैबिनेट नोट जारी किया जाएगा। इससे पहले जुलाई में खाद्य पर मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी। इसके तहत देश की 75 प्रतिशत ग्रामीण तथा 50 फीसद शहरी आबादी को सब्सिडी वाला खाद्यान्न पाने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। संबंधित अंशधारकों तथा राज्य सरकारों से विचार विमर्श के बाद खाद्य मंत्रालय ने विधेयक के मसौदे में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव किया था, जिसे वित्त मंत्री ने मंजूर कर लिया है जो दो प्रमुख बदलाव किए गए हैं, उनमें सामान्य परिवारों को तीन किलोग्राम खाद्यान्न की आपूर्ति तथा इसका दायरा बढ़ाकर इसमें स्तनपान कराने वाली महिलाओं, गरीब और उम्रदराज लोगों के अलावा बच्चों को पोषक आहार शामिल किया जाएगा। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को छह माह के लिए एक हजार रुपए की राशि दी जानी है। अब यह 52 जिलों के बजाय देशभर में दी जाएगी। साधारण परिवारों को सब्सिडी वाले अनाज के बारे में थॉमस ने कहा कि वित्त मंत्री ने इसमें न्यूनतम शब्द जोड़ा है। ऐसे में उत्पादन बढ़ने पर सरकार आवंटन बढ़ा सकती है। विधेयक के मौजूदा रूप में खाद्य मंत्रालय का प्रस्ताव है कि सरकार साधारण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह तीन किलोग्राम चावल देगी, जो समर्थन मूल्य से 50 फीसद से अधिक नहीं होगा। अन्य बदलावों में वित्त मंत्री ने उस शर्त को हटा दिया है जिसमें प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून का लाभ सिर्फ उन राज्यों के साधारण परिवारों को मिलेगा, जहां सार्वजनिक वितरण पण्राली का आधुनिकीकरण हो चुका है। मौजूदा मसौदा साधारण परिवारों को सिर्फ उन राज्यों में लाभ देता है जहां पीडीएस व्यवस्था आधुनिक है। अब यह लाभ सभी राज्यों में दिया जाएगा। इन बदलावों के बारे में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी से विचार-विमर्श हो चुका है। प्रस्तावित विधेयक से सरकार पर सब्सिडी का सालाना बोझ 1,00,000 करोड़ रुपए का पड़ेगा। वर्तमान में सरकार का खाद्य सब्सिडी बिल सालाना 70,000 करोड़ रुपए का है।

No comments:

Post a Comment