सरकार ने बुधवार को उम्मीद जगाई है कि हाथों के हुनर को भी व्यवसायिक कोर्सों में जोड़ा जाएगा और उसी विषय में डिग्री दी जाएगी। सरकार नौवीं कक्षा से आगे के स्तर पर व्यवसायिक शिक्षा पाठ्यक्र म पेश करने करने जा रही है जिस पर 2013 से अमल किया जाएगा। लोकसभा में मेनका गांधी के पूरक प्रश्न के उत्तर में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, हमने राष्ट्रीय व्यवसायिक शिक्षा पाठ्यक्र म ढांचा (एनसीईक्यूएफ) तैयार किया है जिसे केंद्रीय शिक्षा के सलाहकार बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। इसे आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू किए जाने की योजना है। उन्होंने कहा, एनसीईक्यूएफ के तहत नौवीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के स्तर पर व्यवसायिक शिक्षा पाठ्यक्र म लागू करने की योजना है। सिब्बल ने कहा कि हमने डिग्री कालेजों में बीएससी व्यवसायिक पाठ्यक्र म भी लागू करने की योजना बनाई है। इस विषय में विविद्यालयों के कुलपतियों के साथ चर्चा की गई है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले बिहार के शिक्षामंत्री पी के शाही के नेतृत्व में राज्यों के शिक्षामंत्रियों की समिति ने राष्ट्रीय व्यवसायिक शिक्षा पाठ्यक्र म ढांचे को अंतिम रूप दिया है और उसे मंजूर कर लिया गया है। सिब्बल ने कहा कि इस विषय में कई उद्योगों के साथ चर्चा की गई है, जिसमें कपड़ा उद्योग, आटोमोबाइल उद्योग, मीडिया एवं मनोरंजन, विनिर्माण, आतिथ्य एवं पर्यटन आदि शामिल हैं। मंत्री ने कहा, हम क्षेत्रीय कौशल परिषद के साथ सक्रि यता के साथ काम कर रहे हैं और इसे जल्दी ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने देश में 100 सामुदायिक कालेज स्थापित करने के लिए राज्यों के मंत्रियों को लिखा है और उनसे स्थान की पहचान करने को कहा है। बच्चे बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे: सरकार ने बुधवार को कहा कि साल 2020 तक यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि स्कूलों में दाखिल कोई भी बच्चा बीच में अपनी पढ़ाई नहीं छोड़े। इस उद्देश्य के लिए लड़कियों को स्कूल जाने को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। लोकसभा में पी एन पूनिया, शीशराम ओला के प्रश्न के उत्तर में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि जब तक प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर अधिक बच्चियां पढ़ाई करने आगे नहीं आएंगी तब तक उच्च शिक्षा में उनकी हिस्सेदारी नहीं बढ़ेगी। सिब्बल ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार करती है। इस लिहाज से 12वीं पंचवर्षीय योजना में हर जिले में एक डिग्री कॉलेज खोलने का तथा ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 80 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मॉडल स्कूल खोलने की योजना को आगे बढ़ाया है। इस उद्देश्य के लिए अभी केंद्र एक तिहाई धन देता है। लेकिन यह पाया गया है कि इसके कारण राज्य सरकारों की ओर से कम प्रस्ताव सामने आते हैं। अब हमने विचार किया है कि केंद्र सरकार इसके लिए 65 प्रतिशत धन दे जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्र की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत हो। निजी संस्थानों पर अंकुश लगाने के संदर्भ में एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षा कदाचार विधेयक बनाया है जिसे दोनों सदनों को पारित करने की जरूरत है। इसके कानून बनने के बाद निजी संस्थानों की अनियमितताओं पर लगाम कसी जा सकेगी।
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