खाद्य सब्सिडी के भारी बोझ को लेकर पहले से ही हलकान सरकार ने खाद्य मंत्रालय के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें पुराने अनाज से भरे गोदामों को नए अनाज के लिए खाली करने के लिए राशन उपभोक्ताओं को अनाज का दोगुना आवंटन करने का आग्रह किया गया था। इस संबंध में मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह में चर्चा हुई जिसमें वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि इससे खजाने पर पड़ने वाले 32 हजार करोड़ से भी अधिक के बोझ को सरकार बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएम) के सामने पेश खाद्य मंत्रालय के प्रस्ताव में कहा गया था कि अनाजों के मौजूदा गोदाम पुराने अनाजों से भरे हुए हैं और नए अनाज रखने के लिए जगह की कमी है। चूंकि नए गोदाम बनने में समय लगेगा लिहाजा तात्कालिक इंतजाम के तौर पर पुराने अनाजों को खाली करने पर विचार होना चाहिए। इसके लिए खाद्य मंत्रालय ने एक तरकीब भी सुझाई थी। इसके मुताबिक यदि सामान्य (एपीएल) उपभोक्ताओं के अनाज आवंटन को दोगुना करके 20 किलो प्रति माह कर दिया जाए और लाल कार्ड वाले गरीब (बीपीएल) उपभोक्ताओं के लिए भी अनाज का अतिरिक्त आवंटन किया जाए और दाम में भी कुछ कमी कर दी जाए तो इससे गोदामों से पुराना अनाज काफी हद तक उठ जाएगा और तब इस जगह का इस्तेमाल नए अनाज के लिए किया जा सकता है। इससे महंगाई पर भी अंकुश लगने की बात कही गई थी। खाद्य मंत्रालय ने इस योजना को चालू वित्त वर्ष 2012-13 में लागू करने का सुझाव देते हुए इस पर आने वाले अनुमानित खर्च का ब्यौरा भी दिया था। इसके मुताबिक बीपीएल को सस्ते अनाज आवंटन पर करीब 15,029 करोड़ रुपये और एपीएल वर्ग को अतिरिक्त आवंटन पर 17,765 करोड़ रुपये का खर्च मिलाकर कुल 32,794 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। ईजीओएम के मुखिया वित्तमंत्री को यह राशि बहुत ज्यादा लगी और उन्होंने इसे लागू करने से हाथ खड़े कर दिए। ईजीओएम के अन्य सदस्यों, जिनमें खुद खाद्य मंत्री पीजी थॉमस और कृषि मंत्री शरद पवार शामिल थे, भी प्रणब मुखर्जी के फैसले पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं दिखा सके। पिछले दो सालों से बीपीएल के लिए हर साल 50 लाख टन गेहूं व चावल का अतिरिक्त आवंटन किया जा रहा है। गोदाम खाली कराने के लिए खाद्य मंत्रालय इसे चालू वित्त वर्ष में और बढ़ाना चाहता था। इसी के तहत एपीएल वर्ग के लिए तदर्थ तौर पर 40 लाख टन गेहूं व चावल का आवंटन करने का आग्रह किया गया था। यही नहीं, तेज उठाव के लिए अनाजों का मूल्य लागत मूल्य से भी कम यानी गेहूं के लिए 9.50 रुपये प्रति किलो व चावल के लिए 12.45 रुपये प्रति किलो करने का प्रस्ताव था। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का कहना था कि इससे सरकार पर काफी वित्तीय बोझ बढ़ेगा जिसके लिए वे अभी फिलहाल तैयार नहीं हैं। दरअसल खाद्य मंत्रालय अनाज के लिए गोदामों की कमी से जूझ रहा है। नए गोदाम बहुत धीमी गति से बन रहे हैं, लिहाजा नए अनाजों के लिए जगह की भारी समस्या है। पिछले साल अनाज की भारी खरीद हुई थी, जिसका स्टॉक अभी तक गोदामों और उनके बाहर पटा पड़ा है। मार्च 2012 तक सरकारी गोदामों में 5.44 करोड़ टन अनाज का स्टॉक था, जो 2.50 करोड़ टन के निर्धारित बफर स्टॉक के मुकाबले बहुत अधिक है। इस बीच चालू सीजन के गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरू हो चुकी है। ऐसे में खाद्य मंत्रालय को समझ में नहीं आ रहा कि हालात से कैसे निपटा जाए। नए अनाज को भंडारित करने की सबसे बड़ी समस्या दोनों मंत्रालयों के सामने है।
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