भारतीय नेता जब विदेश दौरों पर जाते हैं तो उन्हें स्कॉच, शराब की बोतलों से लेकर सोने-चांदी के आभूषणों तक, पेन ड्राइव से लेकर महंगे आईपैड नोट और मोबाइल फोन तक उपहार में मिलते हैं। इन तोहफों की कीमत 50,000 रुपये तक होती है। कई नेता इन्हें सरकारी खजाने में जमा करा देते हैं तो कुछ इन्हें अपने पास रखना पसंद करते हैं। खजाने में उपहार जमा कराने वालों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सबसे आगे हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारी राजेश कपूर के अनुसार आम लोगों के लिए यह तोहफे खरीदने का कोई प्रावधान नहीं है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, विदेश दौरे के दौरान सबसे कीमती तोहफा सोनिया गांधी को एक वैनिटी केस यानी श्रृंगार के सामान की किट और एक लेडीज पर्स के रूप में मिला जिसकी कीमत 50,000 रुपये आंकी गई। इससे कुछ ही कम कीमत का 49,250 रुपये का पीले रंग का कड़ा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर को मिला। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तो कीमती तोहफे अक्सर मिलते रहते हैं जैसे 40,000 रुपये का गुलदान, 20,000 रुपये का चांदी का बाउल, 20,000 हजार रुपये का सोनी कंपनी का हैंडीकैम, 20,000 रुपये की लकड़ी की मूर्ती, 15,000 रुपये की पेंटिंग और 10,000 रुपये का कालीन। हालांकि प्रधानमंत्री ने जनवरी 2011 से लेकर फरवरी 2012 तक सबसे अधिक तोहफे सरकारी खजाने में जमा करा दिए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज को भी कई तोहफे मिले हैं जिनमें 16,000 रुपये कीमत का सिक्कों का सेट शामिल है। विदेश सचिव रंजन मथई को एक दौरे में 32,000 रुपये का एप्पल आईपैड और विदेश मंत्रालय में निदेशक संजय सिंह को 10,000 हजार रुपये का चांदी का बर्तन मिला था। गृह सचिव आरके सिंह को सैमसंग गैलेक्सी नोट मोबाइल फोन मिला जिसकी कीमत नहीं बताई गई। यह सभी वे तोहफे हैं जो इन अधिकारियों,नेताओं ने खजाने में लौटाए। जहां से इन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय या फिर राष्ट्रीय संग्रहालय में भेजा जाता है। नियमों के अनुसार ये लोग किसी भी तोहफे को उसकी कीमत में से 5,000 रुपये घटाकर साथ ले जा सकते हैं।
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