घोटालों और विवादों में घिरा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) पांच साल और जारी रखा जाएगा। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए जा रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख एनआरएचएम को विस्तार देना है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का कार्यकाल 11वीं योजना के समापन के साथ ही समाप्त हो रहा है। 11वीं योजना पिछले महीने 31 मार्च को समाप्त हो गई है। 12वीं पंचवर्षीय योजना पहली अप्रैल से शुरू हो गई है लेकिन असल में इस योजना को अभी औपचारिक रूप से शुरू होना बाकी है। एनआरएचएम योजना 2005-06 में शुरू की गई थी। अब तक इस योजना पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन इसका एक भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है। इसमें 7 लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। पहला- मातृ मृत्यु दर 254 प्रति एक लाख से घटाकर 100 प्रति एक लाख, दूसरा- शिशु मृत्यु दर 30 प्रति एक हजार, तीसरा- प्रजनन दर घटाकर 1000 पर 21 करना, चौथा- 2009 तक सभी गांवों को पीने का साफ पानी उपलब्ध कराना, पांचवां- बच्चों में कुपोषण को घटाकर वर्तमान दर का 50 प्रतिशत करना, छठा- महिलाओं और बालिकाओं में एनीमिया को काबू करना और सातवां- बालिका लिंग अनुपात 935 प्रति एक हजार करना। लेकिन ये सातों लक्ष्य मंजिल से बहुत दूर रह गए। मातृ मृत्यु दर 2004-05 में 254 प्रति एक लाख थी जो 14 प्वाइंट प्रतिवर्ष की दर से घट रही है ऐसे में 2012 के आखिर तक यह दर 154 प्रति एक लाख रह जाएगी जो लक्ष्य 100 प्रति एक लाख से बहुत दूर है। केरल और तमिलनाडु ने यह लक्ष्य हासिल कर लिया है जबकि असम, मध्य प्रदेश, राजस्थान में यह बहुत ज्यादा है। असम में 390 प्रति एक लाख है। उत्तर प्रदेश में 359, गुजरात में 145, पश्चिम बंगाल में 148 राजस्थान में, 318 बिहार में 261 प्रति एक लाख है। शिशु मृत्यु दर 2006 में 37 प्रति एक हजार था। 2009 में यह घटकर 50 प्रति एक हजार हो गई लेकिन 2012 तक लक्ष्य से दूर 44 प्रति एक हजार रहेगी। आबादी की रफ्तार कम करने के लिए जनसंख्या स्थिरीकरण कार्यक्रम भी इसी योजना के तहत चला है। लक्ष्य था एक हजार पर 21 बच्चे। लेकिन अभी यह एक हजार पर 26 है। 2012 के अंत तक यह 24 प्रति हजार हो जाएगी। सभी गांवों में साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य 2009 तक रखा गया था लेकिन आज भी 70 हजार गांवों में साफ पानी है ही नहीं। यह योजना अपने लक्ष्यों के इतर घोटालों और विवादों से चर्चा में आई है। उत्तर प्रदेश में बड़े बड़े नेता और अधिकारी जेल में हई। कु छ अधिकारियों ने आत्महत्या कर ली है। राजस्थान में कांग्रेस के बड़े नेताओं के पुत्र घोटालों में फंसे पाए गए हैं। अन्य राज्यों में भी बुरा हाल है। इसके बावजूद सरकार एनआरएचएम को 12वीं योजना में भी जारी रखने का प्रस्ताव कर रही है। इस योजना में पांच साल में तीन लाख करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान लगाया गया है। बच्चों में यौन उत्पीड़न रोकने के लिए कानून में संशोधन : बच्चों में यौन उत्पीड़न रोकने के लिए कानून में संशोधन किया जा रहा है। एम्स में जीवन के लिए संघर्ष करते हुए मौत के मुंह में गई बच्ची फलक की घटना के बाद ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय के साथ बाल अपराध की सीमा में 18 वर्ष तक के युवाओं को शामिल करने का प्रावधान किया जा रहा है। घरेलू काम वाली भी यौन उत्पीड़न के दायरे में : घर में काम करने वाली महिलाएं भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून के दायरे में आएंगी। इस बाबत बृहस्पतिवार को कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जा रहा है।
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