Monday, October 24, 2011

आपकी सेहत पर सरकार कर रही कंजूसी


स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी ढांचे की लचर स्थिति के बावजूद इस पर सरकारी उपेक्षा खत्म होने का नाम नहीं ले रही। योजना आयोग ने अपने ताजा आकलन में बताया है कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत बड़ी रकम इस क्षेत्र पर खर्च होने के बाद भी स्वास्थ्य पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का सरकार सिर्फ 1.3 फीसदी ही खर्च कर रही है। योजना आयोग ने अपनी मानव विकास रिपोर्ट- 2011 में स्वास्थ्य क्षेत्र की उपेक्षा पर खास ध्यान दिलाया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1990 में जहां प्रति हजार शिशु में 80 की मौत हो जाती थी, वहीं 2009 में भी यह सिर्फ 50 तक पहुंच सका है। शिशु मृत्यु दर (आइएमआर) को वर्ष 2015 तक 26.7 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जिस तरह 20 साल में सिर्फ 30 बिंदुओं की कमी आई है, उसे देखते हुए यह लक्ष्य अब काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी तरह मातृत्व मृत्यु दर (एमएमआर) में वर्ष 2003 से लेकर 2009 के दौरान सिर्फ 89 बिंदुओं की कमी आई है। पहले जहां एक लाख जीवित जन्म पर 301 माताओं की मौत हो रही थी, वहीं अब यह घटकर 212 रह गई, लेकिन 2012 तक इसे 100 तक पहुंचाने के लक्ष्य से यह बहुत दूर है। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) और जननी सुरक्षा योजना की वजह से संस्थागत प्रसव में तो बढ़ोतरी हुई है। 2006 तक जहां सिर्फ 39 फीसदी महिलाएं ही चिकित्सकीय निगरानी में बच्चे को जन्म दे रही थीं, वहीं 2009 तक यह अनुपात बढ़कर 78 फीसदी हो गया, लेकिन अभी इसे शत प्रतिशत तक पहुंचाना है। इसी तरह कुल प्रजनन दर (टीएफआर) के मामले में नौ राज्यों दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने जरूर वर्ष 2008 तक 2.1 की दर हासिल कर ली है, लेकिन बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे गरीब राज्य में यह दर अब भी तीन से ज्यादा बनी हुई है। अपने देश में अब भी दस हजार की आबादी पर अस्पताल के सिर्फ नौ बिस्तर उपलब्ध हैं। जबकि चीन में यह अनुपात 30 है। इसी तरह भारत में प्रति दस हजार आबादी पर सिर्फ छह डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि चीन में यह संख्या 14 है। नर्स के मामले में तो यह स्थिति बहुत ही खराब है। जहां विकसित देशों में प्रति सौ-डेढ़ सौ लोगों पर एक नर्स उपलब्ध है, भारत में 1205 लोगों पर एक नर्स है।

No comments:

Post a Comment