सूचना प्रौद्योगिकी नीति का मसौदा जारी
सरकार ने शुक्रवार को सूचना प्रौद्योगिकी नीति, 2011 का मसौदा पेश किया। इसका मकसद 2020 तक एक करोड़ कुशल श्रमबल का विकास करना और वैिक आईटी शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करना है। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने नीति का मसौदा पेश करते हुए कहा कि नीति के तहत 2020 तक 200 अरब डालर के निर्यात का भी लक्ष्य रखा गया है। साथ ही आईटी और आईटी संबद्ध उद्योगों से उस समय तक 300 अरब डालर की आमदनी का लक्ष्य तय किया गया है। फिलहाल आईटी निर्यात 59 अरब डालर और राजस्व 88 अरब डालर का है। सिब्बल ने बताया, ‘इस नीति के तहत हमारा उद्देश्य आईटी और आईटी संबद्ध सेवाओं से वर्तमान के 88 अरब डालर के राजस्व को 2020 तक 300 अरब डालर पर पहुंचाने का है। इसके लिए 2020 तक आईटी निर्यात को वर्तमान के 59 अरब डालर से 200 अरब डालर पर पहुंचाने का है। साथ ही इस दौरान आईटी क्षेत्र में एक करोड़ अतिरिक्त श्रमबल तैयार करना है।’
उन्होंने कहा कि भारतीय आईटी उद्योग को अपनी आमदनी का 80 प्रतिशत निर्यात से मिलता है। इस क्षेत्र में 25 लाख कुशल कर्मचारी कार्यरत हैं। सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार विभाग की वेबसाइट पर नीति के मसौदे पर विभिन्न पक्ष एक माह तक अपनी राय दे सकते हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि नीति के मसौदे का मकसद लघु एवं मध्यम उपक्र मों तथा नए वेंचर्स को आईटी को अपनाने के लिए वित्तीय लाभ मुहैया कराना है। उन्होंने कहा कि हम प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं और उसके बाद लघु एवं मध्यम आकार की आईटी कंपनियों को प्रोत्साहन देने का ढांचा तैयार किया जाएगा। मसौदे में क्लाउड आधारित प्रौद्योगिकी में वैिक बाजार में उल्लेखनीय हिस्सेदारी हासिल करने का भी लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों में सेंटर फार एक्सिलेंस के गठन पर भी नीति में जोर दिया गया है। इसके जरिए 2020 तक आईटी विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में कम से कम 3,000 पीएचडी पाने वाले लोगों को लाना है।
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