Wednesday, May 23, 2012

बच्चों के साथ लैंगिक अपराध किया तो खैर नहीं


बच्चों के साथ यौन बर्ताव, पोर्न फिल्मों में उनके इस्तेमाल और लैंगिक अपराध से उनके संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंगलवार को संसद ने पारित कर दिया। लैंगिक अपराध से बच्चों का संरक्षण विधेयक 2012 को लोकसभा ने आज मंजूरी दी। राज्यसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा कि विधेयक के दायरे में 18 साल से कम उम्र के सभी बच्चे-बच्चियों को शामिल किया गया है। इसमें छह तरह के यौन बर्ताव के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। पोर्न फिल्मों में बच्चों के इस्तेमाल को भी इस विधेयक के तहत लाया गया है। कृष्णा तीरथ ने बताया कि विधेयक में प्रावधान किया गया है कि पुलिस को 30 दिन में बच्चे का बयान दर्ज करना होगा और एक साल में मामले को हल करना होगा। इसके अलावा बच्चे की मर्जी से मुकदमा चलेगा। वह चाहे तो अपने घर या किसी अन्य जगह के चयन के लिए स्वतंत्र होगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई पुलिस अधिकारी लैंगिक अपराध के मामले को दर्ज नहीं करता है तो उसके लिए भी कार्रवाई का प्रावधान विधेयक में किया गया है। विधेयक में भारतीय दंड संहिता से कहीं ज्यादा कड़े प्रावधान किए गए हैं। कृष्णा ने कहा, ‘ बुरी नीयत से यदि कोई बच्चों का पीछा भी करेगा तो विधेयक में इतने कड़े दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं कि पीछा करने वाले या ऐसा इरादा करने वाले की रूह कांपेगी।
विधेयक के दुरूपयोग के बारे में कुछ सदस्यों की चिंताओं पर मंत्री ने कहा कि विधेयक में झूठी शिकायत पर भी सजा का प्रावधान किया गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों के साथ कोई शिक्षक या स्कूल का कोई अधिकारी यदि लैंगिक अपराध करता है तो ऐसे मामलों में अव्वल दज्रे के दंड का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि कम से कम दस साल की सजा और जुर्माने के अलावा अधिक से अधिक आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान विधेयक में किया गया है। जहां तक संभव होगा, ऐसे मामलों की जांच का काम महिला पुलिस अधिकारी ही करेगी और वह इंस्पेक्टर की रैंक से नीचे की अधिकारी नहीं होगी। बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौनाचार को भी विधेयक के दायरे में लाया गया है। कुछ सदस्यों द्वारा निठारी कांड की चर्चा किए जाने पर कृष्णा ने कहा कि पहले इस तरह का कानून नहीं था और जो भी कार्रवाई होती थी भारतीय दंड संहिता के तहत होती थी। लेकिन अब कड़ा कानून बनने से चाहे गली में, सड़क पर, घर के भीतर या बाहर या होटल में कहीं भी कोई घटना होती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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