बंधुआ मजदूरी को खत्म करने के लिए विभिन्न कानूनों के बावजूद भारत में अब भी यह प्रथा जारी है। यह जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दी है। आयोग ने कहा कि अब तक ऐसे 2000 से ज्यादा मामलों को दर्ज किया गया है। आयोग के अध्यक्ष के जी बालाकृष्णन ने कहा कि बंधुआ मजदूरी के खिलाफ संविधान के अनच्च्छेद 23 और भादंसं की धारा 374 में प्रावधान है। इसके अलावा बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम (बीएएल) 1976 भी प्रभाव में है। उन्होंने कहा कि यह प्रथा आज भी जारी है और मानवाधिकार आयोग ने अब तक 2514 मामले दर्ज किए हैं। बंधुआ और बाल मजदूरी पर आयोजित कार्यशाला में बालाकृष्णन ने कहा कि जिलाधिकारियों को बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। उन्होंने जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को इस प्रथा से पीडि़त गरीबों का बचाव करने का आह्वान किया। कार्यशाला को संबोधित करने वाले उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी स्वीकार किया कि बरतन और गोती जैसी परंपराओं और रिवाजों के रूप में बंधुआ मजदूरी कायम है। पटनायक ने कहा कि राज्य के कुछ इलाकों में मजदूरों का प्रवास जारी है।
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Sunday, January 23, 2011
भारत में अब भी बंधुआ मजदूरी : बालाकृष्णन
बंधुआ मजदूरी को खत्म करने के लिए विभिन्न कानूनों के बावजूद भारत में अब भी यह प्रथा जारी है। यह जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दी है। आयोग ने कहा कि अब तक ऐसे 2000 से ज्यादा मामलों को दर्ज किया गया है। आयोग के अध्यक्ष के जी बालाकृष्णन ने कहा कि बंधुआ मजदूरी के खिलाफ संविधान के अनच्च्छेद 23 और भादंसं की धारा 374 में प्रावधान है। इसके अलावा बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम (बीएएल) 1976 भी प्रभाव में है। उन्होंने कहा कि यह प्रथा आज भी जारी है और मानवाधिकार आयोग ने अब तक 2514 मामले दर्ज किए हैं। बंधुआ और बाल मजदूरी पर आयोजित कार्यशाला में बालाकृष्णन ने कहा कि जिलाधिकारियों को बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। उन्होंने जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को इस प्रथा से पीडि़त गरीबों का बचाव करने का आह्वान किया। कार्यशाला को संबोधित करने वाले उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी स्वीकार किया कि बरतन और गोती जैसी परंपराओं और रिवाजों के रूप में बंधुआ मजदूरी कायम है। पटनायक ने कहा कि राज्य के कुछ इलाकों में मजदूरों का प्रवास जारी है।
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