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Thursday, January 13, 2011

तीन साल में 28 गांवों में पहुंची बिजली

झारखंड के चतरा जिले में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत 1037 गांवों को विद्युतीकृत किया जाना था। शासन ने इस काम के लिए कार्यदाई संस्था को भरपूर समय दिया। दो-दो बार काम की समयवाधि बढ़ाई। इसके बाद भी महज 28 गांव रोशन हुए। यानी तीन वर्षो में करीब ढाई फीसदी काम हुआ। जिले के 1009 गांवों के लोगों के लिए बिजली अब भी सपना है। चतरा जिले में ग्रामीण विद्युतीकरण की यह रिपोर्ट विकास योजनाओं को मुंह चिढ़ाने का जीता जागता उदाहरण हैं। विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता इंद्रदेव चौधरी का कहना है कि तीन वर्ष पूर्व हुए एकरारनामा के मुताबिक दामोदर वैली कारपोरेशन (डीवीसी) को मार्च 2010 तक सभी विद्युतविहीन राजस्व गांवों का विद्युतीकरण कर देना था। निर्धारित समय में काम पूरा न होने के कारण कार्यदाई संस्था को छह महीने का अवधि विस्तार किया गया, लेकिन उसके बाद भी विद्युतीकरण का कार्य में तेजी नहीं आई। हालात को देखते हुए एक बार फिर छह महीने का अतिरिक्त समय दिया गया। मगर स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने बताया कि अभी तक डीवीसी ने जिले के 283 गांवों में खंभा और तार लगा दिया है। 600 गांवों में कार्य प्रगति पर है। जिले में राजस्व वाले गांवों की संख्या 1341 है। इसमें से 304 गांव पूर्व से ही विद्युतीकृत है। शेष विद्युतविहीन गांवों को विद्युतीकरण करने का ठेका डीवीसी को दिया गया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह समझ पाना मुश्किल है कि आखिर विद्युतविहीन गांवों में बिजली कब तक पहुंचेगी।
छह विद्युत सब स्टेशन निर्माण अधर में :
डीवीसी को जिले में छह विद्युत सब स्टेशन का निर्माण भी करना है। इसके लिए उसे 2010 तक का समय दिया गया था। अभी तक एक भी सब स्टेशन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में अगर भविष्य में गांवों में बिजली पहुंच भी जाए लेकिन उन्हें रोशन करना शायद संभव न होगा।
वन कानून आ रहा आड़े :
वन विभाग के रोड़े के कारण भी 200 गांवों में विद्युतीकरण का काम लटका हुआ है। जब तक वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलता है, तब तक लगभग 200 गांवों को विद्युतीकृत नहीं किया जा सकता है।