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Monday, December 19, 2011

सोनिया के दबाव में खाद्य सुरक्षा बिल पर मुहर


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के वीटो के बाद खाद्य सुरक्षा विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर कर दिया है। यूपी के सियासी दंगल में राहुल को खाद्य सुरक्षा विधेयक का अस्त्र मुहैया कराने के लिए सरकार अब इसे सोमवार को संसद में पेश कर सकती है। यह बात अलग है कि संसद में पेश होने के बाद इसे स्थायी समिति के पास विचार के लिए भेजा जाना तय है। इससे देश की करीब एक तिहाई आबादी को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक पर बहुत ज्यादा चर्चा नहीं हुई। सूत्र बताते हैं कि सिर्फ खाद्य सब्सिडी को लेकर संक्षिप्त चर्चा हुई, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष का इस विधेयक को लेकर पूरी सरकार पर इतना ज्यादा दबाव था कि बैठक में इस पर तुरंत सहमति की मुहर लग गई। राकांपा सुप्रीमो और खाद्य मंत्री शरद पवार व दूसरे सहयोगी दलों की चिंताओं को भी संप्रग अध्यक्ष का ड्रीम बताते हुए इसे अब न रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने मना लिया। वैसे तो खुद कांग्रेस के मंत्री भी मौजूदा आर्थिक हालात और जन वितरण प्रणाली के ढांचे के मद्देनजर इस कानून के पक्ष में अभी नहीं हैं। खाद्य सुरक्षा कानून का लाभ देश की 63.5 प्रतिशत आबादी को मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 75 तो शहरी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत आबादी इसके दायरे में आएगी। ग्रामीण और शहरी गरीबों को प्रति व्यक्ति 7 किलो प्रति माह के हिसाब से अनाज मिलेगा। कानून में 5 व्यक्तियों की इकाई को परिवार माना गया है। इसको लागू करने में सरकार पर पहले साल 95000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का बोझ आएगा। यह तीसरे साल तक 1.50 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। वर्तमान में सरकार 31000 करोड़ रुपये खाद्य सब्सिडी पर खर्च कर रही है। इसके अतिरिक्त तीसरे साल देश में कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए गोदाम बनाने पर 50000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होगी। खाद्य मंत्री केवी थामस ने कहा था कि इसको लागू करने के लिए करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इसके तहत अब गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों और अंत्योदय अन्न योजना के तहत आने वाले वर्ग के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। इसके विपरीत अब प्राथमिकता वाले और सामान्य उपभोक्ता वर्ग के तहत जनता को बांटा गया है। प्राथमिकता वर्ग में आने वाले गरीबों को एक रुपये प्रति किलो की दर पर मोटा अनाज, दो रुपये किलो के हिसाब से गेहूं और 3 रुपये किलो के हिसाब से चावल दिया जाएगा, जबकि सामान्य उपभोक्ता वर्ग को अनाज के समर्थन मूल्य का 50 फीसदी देना होगा। जिन गरीबों को अनाज दिया जाना है उनकी संख्या सामाजिक आर्थिक जनगणना के नतीजे आने के बाद तय होगी।