Tuesday, September 27, 2011

घट रही गरीबों की संख्या


योजना आयोग के सदस्य अरुण मैड़ा का दावा
शहरी गरीबी रेखा को 32 रुपए प्रति व्यक्ति खपत के आधार पर निर्धारित करने के लिए आलोचना के शिकार योजना आयोग ने सोमवार को कहा कि देश में गरीबों की संख्या कम हो रही है। योजना आयोग के सदस्य अरुण मैड़ा ने आज एसोचैम के समारोह में कहा कि आज गरीबों की संख्या कम हो रही है, चाहे आप (आंकने के लिए) तेंदुलकर पद्धति को अपनाएं या फिर इससे पूर्व अपनाई जाने वाली पद्धति को। यह बयान योजनाआयोग के हाल में तेंदुलकर पद्धति से आंकी गई गरीबी रेखा पर मचे हंगामे के बाद आया है। इस आकलन में कैलोरी के अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा को भी ध्यान में रखा गया है। सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक हलफनामे में योजना आयोग ने कहा कि शहरी इलाकों में 32 रुपए प्रति दिन की खपत करने वाले को गरीब माना जाएगा। ग्रामीण इलाकों में यह सीमा 26 रुपए प्रति दिन तय की गई है। मैड़ा ने कहा, ‘‘तेंदुलकर समिति को इसके आकलन के लिए पद्धति सुझाने के लिए कहा गया था कि सरकारी कार्यक्र मों से हालात सुधर रहे हैं या नहीं।उन्होंने कहा कि गरीब सापेक्ष अवधारणा है और आज की गरीबी की तुलना पिछले दिनों से करना गलत होगा। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि जो व्यक्ति आज 15,000 रुपए प्रति माह कमाता है वह गरीब है। गरीबी बेहद सापेक्ष चीज है। इसलिए देश में क्या हो रहा है गरीबी का स्तर भी इसी के आधार पर परिभाषित किया जाता है।तेंदुलकर समिति की पद्धति के आधार पर योजना आयोग के आकलन के मुताबिक एक मार्च 2005 को 40.74 करोड़ लोग गरीब थे और 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत की जनसंख्या 1.21 अरब हैं।

No comments:

Post a Comment