Tuesday, September 27, 2011

बेसहारा बच्चों को संभालने के लिए बनी योजना


योजना के लिए 14 करोड़ रुपए का प्रस्ताव केंद्र को भेजा नशेड़ी, एचआईवी पीड़ित, विकलांग, बेसहारा व भिखारी बच्चों के विकास के लिए चलाया जाएगा सघन अभियान
दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेसहारा बच्चों के लिए एक बृहद योजना बनाई है। जिसे क्रियान्वित कराने के लिए केंद्र सरकार के पास 13 करोड़ 80 लाख 40 हजार रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। आर्थिक सहयोग के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं से भी मदद की अपेक्षा की गई है। दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस साल समन्वित बाल संरक्षण परियोजना का दायरा बढ़ा दिया है। बेसहारा बच्चों के लिए 25 नए शेल्टर होम खोलने का प्रस्ताव है। जिला स्तर पर बाल संरक्षण समिति का गठन किया जाएगा। अक्टूबर से स्टेटEOFप्शन रिसोर्स एजेंसी को संचालित करने की योजना है। साथ ही समन्वित बाल संरक्षण परियोजना के लिए 21 चिल्ड्रन होम, 3 आव्जव्रेशन होम, 1 प्लेस ऑफ सेफ्टी, एक स्पेशल होम, 6 चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, 3 ज्यूनियाल जस्टिस बोर्ड, 5 शेल्टर होम (एनजीओ द्वारा संचालित), 51 एनजीओ और 11EOFप्शन एजेंसी का सहयोग लिया जाएगा। जिसके लिए अधिक धन की जरूरत महसूस की जा रही है। गौरतलब है कि दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को 27 जुलाई को वित्तीय सहायता की मंजूरी के लिए एक प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। कुल 13 करोड़ 80 लाख 40 हजार रुपए के प्रस्ताव में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 10 करोड़ 49 लाख 35 हजार और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 3 करोड़ 7 लाख 77 हजार रुपए, जबकि गैर सरकारी संस्थाओं से 23 लाख 27 हजार रुपए की आर्थिक सहयोग की अपेक्षा की गई है। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद बाल मजदूर, नशेड़ी बच्चे, एचआईवी से पीड़ित गरीब बच्चे, भीख मांगने वाले बच्चे व विकलांग बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाने की योजना है। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने समन्वित बाल संरक्षण परियोजना के लिए पिछले साल दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग को 2 करोड़ 14 लाख 79 हजार रुपए और राज्य सरकार ने मात्र 20 लाख रुपए दिए। महिला एवं बाल विकास विभाग ने केंद्र सरकार द्वारा आवंटित धन राशि में से एक करोड़ 44 लाख 16 हजार रुपए और राज्य सरकार द्वारा आवंटित धन राशि में से 15 लाख 28 हजार रुपए खर्च किए। इसप्रकार 75 लाख 35 हजार रुपए खर्च नहीं हो पाए। बताया जाता है कि गत वित्तीय वर्ष में काम करने का अवसर मात्र आठ महीने ही मिला।

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