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Saturday, January 1, 2011

सूचना आयुक्त दफ्तर भी सूचना को मोहताज

जिस राज्य के अन्ना हजारे जैसे समाजसेवियों के संघर्ष ने देश को सूचना अधिकार कानून बनाने पर बाध्य किया, आज उस राज्य का सूचना आयुक्त कार्यालय ही सूचना पाने को मोहताज है। मांगी गई सूचना चर्चित आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले जैसे उस संवेदनशील विषय से संबंधित है, जिसके कारण हाल ही में एक मुख्यमंत्री तक को विदा होना पड़ा। महाराष्ट्र के सूचना आयुक्त डॉ. रामानंद तिवारी के सरकारी निजी सचिव कमलेश बी. त्रिभुवन ने राज्य सरकार के नगर विकास विभाग से करीब दो माह पहले तीन सूचनाएं मांगी थीं। ये सूचनाएं आदर्श हाउसिंग सोसायटी को समय-समय पर दी गईं एफएसआइ (चटाई क्षेत्र सूचकांक) से संबंधित हैं। सूचना आयुक्त कार्यालय एवं नगर विकास विभाग के बीच सिर्फ एक सड़क का फासला है। इसके बावजूद स्वयं सूचना आयुक्त कार्यालय द्वारा मांगी गई सूचना अब तक हासिल नहीं हो पाई है। दैनिक जागरण ने इस संबंध में सूचना आयुक्त से संपर्क करने की कोशिश की। लंबी छुट्टी पर होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका, लेकिन सूचना आयुक्त कार्यालय के सूत्रों ने इस खबर की पुष्टि की है । गौरतलब है कि वर्तमान सूचना आयुक्त डॉ. रामानंद तिवारी सन 2002 से 2008 तक नगर विकास सचिव के पद पर कार्यरत रहे हैं। यही वह दौर था, जब कुलाबा क्षेत्र में कई विभागों के विभिन्न नियमों को धता बताकर आदर्श हाउसिंग सोसायटी की इमारत खड़ी की जा रही थी । कुछ माह पहले जब यह इमारत अपनी अनियमितताओं के कारण चर्चा में आनी शुरू हुई तो आदर्श सोसायटी को अपने कार्यकाल में दी गई अनुमतियों की जानकारी पाने के लिए पूर्व नगर विकास सचिव तिवारी ने अपने सरकारी निजी सचिव कमलेश त्रिभुवन के जरिए छह नवंबर 2010 को सूचना अधिकार कानून के तहत एक आवेदन नगर विकास विभाग को भिजवाया। विभाग द्वारा इस आवेदन के जवाब में दो बार अपेक्षित जानकारियों की नकल बनाने के लिए शुल्क मांगा गया, जोकि जमा किया जा चुका है। इसके बावजूद सूचना आयुक्त कार्यालय को अपेक्षित सूचना का इंतजार है । सूचना कार्यालय सूत्रों का कहना है कि वर्तमान सूचना आयुक्त ने नगर विकास विभाग के सचिव पद पर रहते हुए आदर्श हाउसिंग सोसायटी को नियमानुसार जितनी अनुमतियां दीं, उससे कहीं ज्यादा अनुमतियां उनकी सेवानिवृत्ति के बाद दी गई हैं, लेकिन इस घोटाले का सारा ठीकरा तत्कालीन नगर विकास सचिव रामानंद तिवारी पर ही फोड़ा जा रहा है। कुछ सप्ताह पहले आदर्श घोटाले से संबंधित कुछ फाइलों के गायब होने की रपट भी संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराई जा चुकी है।