केंद्र और राज्य सरकारें गरीबों के उत्थान व उनकी आर्थिक दशा में सुधार के बड़े- बड़े दावे भले ही करें, लेकिन हकीकत यह है कि भारत में गत तीन दशकों में आर्थिक असमानताएं बढ़ी हैं। विभिन्न तबकों की आमदनी के बीच फासला बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमीरों की आमदनी गरीबों की आमदनी से 12 फीसदी ज्यादा है। देश की एक अरब इक्कीस करोड़ की आबादी के 42 फीसदी हिस्से (तकरीबन 51 करोड़ लोग) की एक दिन की आमदनी आज भी महज 1.25 डॉलर (करीब 75 रुपये) ही है। अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के महासचिव एंजल गुरिया द्वारा पेरिस में जारी रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में समानतावादी कहलाने वाले मुल्कों में गरीब-अमीर के बीच का फासला बढ़ा है। दुनिया के 10 फीसदी अमीरों की आमदनी गरीबों की तुलना में 9 गुना ज्यादा है। चीन और मेक्सिको में अमीरों की आमदनी गरीबों की आमदनी से 25 प्रतिशत ज्यादा है। ओईसीडी ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर अपनी रिपोर्ट में भारत,चीन, अर्जेटीना, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों का आकलन किया है। इन सात देशों में से भारत में गरीबी दर सबसे ज्यादा है, जहां 42 फीसदी आबादी की प्रतिदिन की आमदनी मात्र 1.25 डॉलर है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गत तीन दशकों में आर्थिक असमानताएं बढ़ीं हैं, विभिन्न तबकों की आमदनी के बीच फासला बहुत ज्यादा बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां, ब्राजील, इंडोनेशिया और अर्जेटीना में पिछले कुछ सालों में अमीरों और गरीबों के बीच का आर्थिक फासला घटा है, वहीं चीन, भारत, दक्षिण अफ्रीका और रूस में ये बढ़ा है। आमदनी में अंतर की वजह से लोगों के बीच का फासला बढ़ रहा है। इसके अलावा तकनीकी विकास का फायदा केवल ज्यादा प्रशिक्षित कामगारों को ही मिल पाया है। ओईसीडी का कहना है कि बाजार की दृष्टि से देखा जाए तो टैक्स और दूसरी कल्याणकारी योजनाओं से सभी तबकों के बीच की असमानता दूर होती है, लेकिन 1990 के दशक से ये योजनाएं ज्यादा कारगर साबित नहीं हुई हैं। यही कारण है कि दुनिया के ज्यादातर देशों में कल्याणकारी योजनाएं पिछले 15 सालों में फलदायी साबित नहीं हो पाई। अमीरों पर कम टैक्स लगाए जाने को, इस रिपोर्ट में अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ते फासले का दूसरा कारण बताया गया है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए और ज्यादा मजदूरों को काम में लगाने की कोशिश की जानी चाहिए। सरकारों को अपनी टैक्स प्रणाली में बदलाव लाना होगा और अमीरों पर टैक्स का ज्यादा भार डालना होगा। ओईसीडी के महासचिव एंजल गुरिया के मुताबिक, संगठन की रिपोर्ट उस धारणा को दूर करती है जिसकेमुताबिक आर्थिक बढ़ोतरी का फायदा वंचित तबकों तक भी पहुंचता है। उन्होंने कहा, जब तक समग्र बढ़ोतरी नहीं होती, तब तक अमीरों और गरीबों के बीच का फासला बढ़ता रहेगा। सरकारों को इससे निपटने के लिए जल्द ही कदम उठाने होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमीरों-गरीबों के बीच बढ़ते फासले को ही एक नई चुनौती बताया है। उन्होंने ट्रिकल डाउन थ्योरी की तीखी आलोचना करते हुए कहा, अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की वो नीति हमेशा असफल रही है, जिसके तहत अमीरों से कम टैक्स लिया जाता है।
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