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Sunday, May 22, 2011

जाति जनगणना और बीपीएल की गिनती को केंद्र की मंजूरी


आजाद भारत में पहली बार जाति, धर्म के आधार पर जनगणना और गरीबी रेखा से नीचे गुजर करने वालों की गिनती को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। अगले माह शुरू होने वाली इस कवायद में पहली बार शहरी गरीबों का भी आकलन होगा। हालांकि केंद्रीय कैबिनेट ने यह फैसला किया है कि जाति और धर्म से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। सरकार की तैयारी इस गिनती से सही हकदारों की पहचान कर उन्हें सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है। इससे पहले जाति और धर्म के आधार पर भारत में जनगणना 1931 में की गई थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि इस गिनती के लिए देश के हर घर का दरवाजा खटखटाया जाएगा और सामाजिक व आर्थिक आधार पर जनगणना का यह काम दिसंबर 2011 तक पूरा हो जाएगा। सोनी के मुताबिक इस कवायद से संसद में राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की ओर से जातीय जनगणना और सामाजिक व आर्थिक आधार पर गिनती कराने का भरोसा पूरा होगा तथा उनकी ओर से रखी गई चिंताएं भी दूर होंगी। सोनी ने स्पष्ट किया कि लोगों की जाति और धर्म संबंधी सूचनाएं गोपनीय रखी जाएंगी। गरीबों की गिनती का इस्तेमाल जहां 12वीं पंचवर्षीय योजना में सब्सिडी का सीधे लाभ पहुंचाने के लिए किया जाएगा। जाति आधारित आंकड़े रजिस्ट्रार जनरल के पास जाएंगे। कागज विहीन इस जनगणना को विशेष टेबलेट कंप्यूटर के जरिए अंजाम दिया जाएगा और घर-घर होने वाली इस गिनती में राज्य सरकार के कर्मचारियों का इस्तेमाल किया जाएगा। 2002 के बाद हो रहे बीपीएल सर्वेक्षण में गरीब तय करने के पैमानों में भी इस बार व्यापक बदलाव किए गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजय कुमार प्रकाश ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में गरीबी रेखा में शामिल करने, बाहर रखने और अन्य सात आधार पर निर्धारण की व्यवस्था की गई है। इसमें घर में लैंडलाइन फोन और दस हजार रुपये तक की मासिक आमदनी, घर, जमीन, घर में पुरुष सदस्यों की संख्या और शैक्षणिक स्थिति जैसे पैमाने तय किए गए हैं। इनमें अधिकतर मापदंड वही हैं जो एनसी सक्सेना समिति ने सुझाए थे। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर जमीनी स्तर पर इन्हें परखा भी था।